राजकीय गोडावण दिवस: मरुधरा के राज्य पक्षी के संरक्षण की एक नई पहल (Rajkiya Godawan Diwas)

राजस्थान के वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री ने हर साल 21 मई को आधिकारिक रूप से ‘राजकीय गोडावण दिवस’ (Rajkiya Godawan Diwas) मनाने की घोषणा की है. इस विशेष दिवस को घोषित करने का मुख्य उद्देश्य राजस्थान के राज्य पक्षी ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ (Great Indian Bustard – GIB), जिसे स्थानीय भाषा में गोडावण (Godawan) कहा जाता है, के संरक्षण को बढ़ावा देना और इस लुप्तप्राय (Endangered) प्रजाति को बचाना है.

इस ऐतिहासिक पहले आयोजन की साक्षी जैसलमेर की धरती बनी, जहां वन्यजीव प्रेमियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच इस मुहिम की शुरुआत की गई.

राजकीय गोडावण दिवस (Rajkiya Godawan Diwas) फैक्ट फाइल

  • घोषित दिवस (Official Day) राजकीय गोडावण दिवस – 21 मई (Rajkiya Godawan Diwas – May 21)
  • प्रथम आयोजन स्थल (Maiden Event Venue) उत्कर्ष भवन, जैसलमेर (Jaisalmer)
  • गोडावण की वर्तमान संख्या (GIB Population) जैसलमेर वन्यजीव क्षेत्र में लगभग 130 और ब्रीडिंग सेंटर्स में 87 गोडावण
  • प्रमुख प्रजनन केंद्र (Breeding Centers) सुदासरी (Sudasari) और रामदेवरा (Ramdevra)
  • अंडों के ट्रांसफर पर पूर्ण प्रतिबंध: जैसलमेर के ब्रीडिंग सेंटर्स में कृत्रिम गर्भाधान (Artificial Insemination) तकनीक से तैयार होने वाले गोडावण के अंडों को अब राजस्थान से बाहर किसी भी अन्य राज्य में नहीं भेजा जाएगा.
  • प्रकृति के अनुकूल विशेष प्रशिक्षण: कृत्रिम केंद्रों (Breeding Centers) में पाले जा रहे गोडावण के चूजों (Chicks) को सीधे जंगलों में छोड़ने के बजाय, पहले उन्हें प्राकृतिक परिस्थितियों में जीवित रहने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जाएगा.
  • सुरक्षा के लिए विशेष प्रतीक: जागरूकता बढ़ाने और इस मुहिम को यादगार बनाने के लिए उद्घाटन समारोह के दौरान सुदासरी ब्रीडिंग सेंटर में गोडावण की विशेष मूर्तियों (Statues) का अनावरण किया गया है.

कृत्रिम गर्भाधान और अंडों को लेकर बड़ा फैसला: अब दूसरे राज्यों में नहीं जाएंगे गोडावण के अंडे

जैसलमेर के ब्रीडिंग सेंटर्स में कृत्रिम गर्भाधान (Artificial Insemination) के जरिए उत्पादित किए जाने वाले गोडावण के अंडों को अब किसी भी अन्य राज्य में नहीं भेजा जाएगा।

अतीत में वन्यजीवों के आदान-प्रदान के अनुभवों का हवाला देते हुए मंत्री ने बताया कि राजस्थान ने पहले भी दूसरे राज्यों से आने वाले गोडावण के अंडों के अनुरोधों को खारिज कर दिया था। इस फैसले के पीछे 3 मुख्य रणनीतियां काम कर रही हैं:

स्थानीय स्तर पर संवर्धन: अंडों और चूजों को राजस्थान की प्राकृतिक आबोहवा में ही बड़ा किया जाएगा।

प्राकृतिक प्रशिक्षण (Natural Training): ब्रीडिंग सेंटर्स में पाले जा रहे चूजों (Chicks) को खुले वन्यजीव क्षेत्रों में छोड़ने से पहले प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुकूल ढलने की विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी।

बजट घोषणा की पूर्ति: यह वार्षिक आयोजन पिछले बजट सत्र में मुख्यमंत्री द्वारा राज्य पक्षी के संरक्षण के लिए जताई गई प्रतिबद्धता का ही हिस्सा है।

सुदासरी और रामदेवरा ब्रीडिंग सेंटर्स से जमीनी हकीकत

गोडावण को विलुप्त होने से बचाने के लिए जैसलमेर के सुदासरी (Sudasari) और रामदेवरा (Ramdevra) में विशेष प्रजनन केंद्र चलाए जा रहे हैं। वर्तमान में, जैसलमेर के खुले वन्यजीव क्षेत्र में लगभग 130 गोडावण स्वतंत्र रूप से विचर रहे हैं, जबकि 87 गोडावण इन स्थानीय ब्रीडिंग सेंटर्स में सुरक्षित देखरेख में फल-फूल रहे हैं।

‘राजकीय गोडावण दिवस’ जैसी पहल स्थानीय लोगों को इस बेजुबान पक्षी के संरक्षण के प्रति और अधिक संवेदनशील बनाएगी।

पीएम मोदी की ‘मन की बात’ का प्रभाव

सराहना: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में राजस्थान के इस राज्य पक्षी (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) के संरक्षण प्रयासों की तारीफ करने के बाद भी लोगों में इसे जानने की उत्सुकता बढ़ी है।

गोडावण (Great Indian Bustard – GIB) की संपूर्ण ‘फैक्ट फाइल’

  • वैज्ञानिक नाम: आर्डियोटिस नाइग्रिसेप्स (Ardeotis nigriceps).
  • स्थानीय नाम: गोडावण, सोहन चिड़िया, हुकना, गुराइं।
  • राज्य पक्षी का दर्जा: 22 मई 1981 को राजस्थान सरकार द्वारा घोषित.
  • राष्ट्रीय दौड़: वर्ष 1963 में यह भारत का ‘राष्ट्रीय पक्षी’ बनने की दौड़ में मोर के साथ मुख्य दावेदार था.
  • पहचान: यह ग्रासलैंड (घास के मैदानों) की सेहत को दर्शाने वाला ‘इंडिकेटर पक्षी’ माना जाता है।
  • कद और वजन: यह दुनिया के सबसे भारी उड़ने वाले पक्षियों में से एक है. इसका वजन 15 से 18 किलोग्राम तक और ऊंचाई लगभग 1 मीटर होती है.
  • भोजन: यह एक सर्वाहारी (Omnivorous) पक्षी है, जो मुख्य रूप से सेवण घास के बीज, कीड़े-मकोड़े, टिड्डियाँ, छिपकली और सांप खाता है.
  • मुख्य आवास: मुख्य रूप से शुष्क और अर्ध-शुष्क घास के मैदान. राजस्थान का राष्ट्रीय मरु उद्यान (Desert National Park – जैसलमेर और बाड़मेर) इनका सबसे बड़ा सुरक्षित गढ़ है.
  • वर्तमान आबादी: वर्तमान में जंगलों और ब्रीडिंग सेंटर्स को मिलाकर कुल संख्या करीब 217 है, जिसमें से अधिकांश अकेले जैसलमेर में हैं.
  • कमजोर सामने की नजर: गोडावण की ‘फ्रंटल विजन’ (सामने देखने की क्षमता) कमजोर होती है. इस कारण उड़ते समय इन्हें हाई-टेंशन बिजली के तार दिखाई नहीं देते और वे इनसे टकरा जाते हैं, जो इनकी मृत्यु का सबसे बड़ा कारण है.
  • धीमी प्रजनन दर: मादा गोडावण साल में अमूमन केवल एक अंडा ही देती है और वह भी जमीन पर, जिससे जंगली जानवरों (जैसे लोमड़ी, कुत्ते) द्वारा अंडे नष्ट होने का खतरा रहता है.
  • पलायन का खतरा: जैसलमेर सीमा से सटे होने के कारण ये पक्षी उड़कर पाकिस्तान चले जाते हैं, जहाँ इनका अवैध शिकार किया जाता है.
  • विशेष दिवस: आम जनता में जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 21 मई को ‘गोडावण दिवस’ मनाया जाता है.
  • प्रोजेक्ट ग्रेट इंडियन बस्टर्ड: राजस्थान सरकार द्वारा वर्ष 2013 में इस प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई.
  • लीगल स्टेटस: IUCN की रेड लिस्ट में ‘गंभीर रूप से संकटग्रस्त’ (Critically Endangered) श्रेणी में शामिल. भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 (Schedule-I) के तहत सर्वोच्च सुरक्षा प्राप्त.

डेजर्ट नेशनल पार्क में गोडावण के अलावा और कौन से मुख्य वन्यजीव देखे जा सकते हैं?

डेजर्ट नेशनल पार्क (Desert National Park) सिर्फ गोडावण ही नहीं, बल्कि कई अन्य दुर्लभ मरुस्थलीय जीवों का भी घर है। यहाँ आप जीप सफारी (Jeep safari) के दौरान मरुस्थलीय लोमड़ी (Desert fox), चिंकारा (Indian gazelle), जंगली बिल्ली (Desert cat) और कई प्रकार के जहरीले सांप जैसे पीवणा को देख सकते हैं। हमारी टीम के फील्ड सफारी एक्सपीरियंस (Safari experience) के दौरान हमें यहाँ कई शिकारी पक्षी (Birds of prey) जैसे बाज और गिद्ध भी देखने को मिले। यदि आप प्रकृति प्रेमी हैं, तो ₹1500 के बजट में होटल (Hotels in budget) लेकर यहाँ रुकना और वन्यजीवों को देखना एक बेहतरीन अनुभव है।

राजस्थान की संस्कृति में गोडावण का क्या महत्व है और इसे क्या नाम दिए गए हैं?

गोडावण राजस्थान का राज्य पक्षी (State bird) है, जिसे स्थानीय भाषा में ‘शर्मिला पक्षी’ या ‘हुकना’ भी कहा जाता है। हाड़ौती क्षेत्र में इसे ‘मालमोरड़ी’ के नाम से जाना जाता है। राजस्थानी लोककथाओं और मरुस्थलीय संस्कृति (Desert culture) में इस पक्षी का विशेष स्थान है। हमारी टीम ने फील्ड विजिट के दौरान एक लोकल दुकान (Local shop) के संचालक से बात की, जिन्होंने बताया कि यहाँ के ग्रामीण गोडावण को मरुभूमि का गौरव (Pride of desert) मानते हैं। स्थानीय लोग इसके संरक्षण को अपनी परंपरा और लोक-संस्कृति का एक अहम हिस्सा मानते हैं।

गोडावण का मुख्य भोजन क्या है और यह मरुस्थल के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए क्यों जरूरी है?

: गोडावण एक सर्वाहारी पक्षी (Omnivorous bird) है, जिसका मुख्य भोजन कीड़े-मकोड़े, टिड्डियाँ, भृंग (Beetles), छिपकलियाँ और स्थानीय वनस्पति के बीज हैं। हमारी टीम के अनुभव (Team’s experience) के अनुसार, यह पक्षी फसलों को नुकसान पहुँचाने वाले कीड़ों को खाकर किसानों के लिए एक प्राकृतिक मित्र (Natural friend) का काम करता है। डेजर्ट नेशनल पार्क (Desert National Park) के स्थानीय गाइड (Local guide) ने हमें बताया कि गोडावण को मरुस्थल के घास के मैदानों का स्वास्थ्य सूचक (Health indicator) माना जाता है। इसका स्वस्थ होना इस पूरे मरुस्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र (Desert ecosystem) के संतुलन के लिए बेहद जरूरी है।

जैसलमेर में वन्यजीव पर्यटन के लिए सबसे अच्छा मौसम कौन सा है?

जैसलमेर और डेजर्ट नेशनल पार्क (Desert National Park) घूमने के लिए सबसे बेहतरीन समय अक्टूबर से मार्च के बीच का सर्दियों का मौसम (Winter season) होता है। इस दौरान यहाँ का तापमान काफी सुखद रहता है, जिससे खुली जीप सफारी (Jeep safari) का आनंद आसानी से लिया जा सकता है। सर्दियों में गोडावण के साथ-साथ कई प्रवासी पक्षी (Migratory birds) भी यहाँ आते हैं। हमारी टीम ने अपनी यात्रा के दौरान देखा कि इस मौसम में पार्क के पास स्थित लोकल ढाबे (Local dhabha) और हस्तशिल्प की दुकानें (Handicraft shops) पूरी तरह गुलजार रहती हैं, जहाँ आप स्थानीय संस्कृति का अनुभव ले सकते हैं।

पर्यटकों को जैसलमेर में गोडावण देखते समय किन नियमों का पालन करना चाहिए?

डेजर्ट नेशनल पार्क (Desert National Park) के स्थानीय गाइड (Local guide) ने हमारी टीम को बताया कि गोडावण एक बेहद शर्मीला पक्षी (Shy bird) है। इसलिए वन्यजीव फोटोग्राफी (Wildlife photography) या साइटिंग के दौरान पर्यटकों को शांत रहना चाहिए और पक्षी से कम से कम 200 मीटर की दूरी बनाए रखनी चाहिए। पार्क के अंदर प्लास्टिक फेंकना, तेज आवाज में संगीत बजाना या गाड़ियों का हॉर्न बजाना सख्त मना है। पर्यावरण संतुलन (Ecological balance) और वन्यजीव सुरक्षा (Wildlife safety) के नियमों का पालन करके ही आप इस अद्भुत पक्षी को बिना परेशान किए देख सकते हैं।

2 दिन में जैसलमेर कैसे घूमें (How to visit Jaisalmer in 2 days) और गोडावण टूर को इसमें कैसे शामिल करें?

2 दिन के टूर प्लान (2 Days tour plan) में पहले दिन आप सुबह सोनार किला (Jaisalmer Fort), पटवों की हवेली और गड़ीसर लेक घूमें। दोपहर बाद सम के धोरों (Sam Sand Dunes) पर जाकर कैमल सफारी और कैंपिंग का मजा लें। दूसरे दिन सुबह जल्दी डेजर्ट नेशनल पार्क (Desert National Park) के लिए निकलें, जहाँ आप स्थानीय गाइड के साथ 3 से 4 घंटे में गोडावण साइटिंग (Bustard sighting) और वन्यजीवों को देख सकते हैं। वापसी में कुलधरा भूतिया गाँव (Kuldhara Village) देखते हुए आपका 2 दिन का जैसलमेर दौरा पूरी तरह से मुकम्मल हो जाएगा।

डेजर्ट नेशनल पार्क जैसलमेर घूमने का बजट क्या है और यहाँ ठहरने की क्या व्यवस्था है?

डेजर्ट नेशनल पार्क की यात्रा आप बेहद कम बजट में प्लान कर सकते हैं। यहाँ प्रति व्यक्ति एंट्री फीस (Entry fee) लगभग ₹100 है, जबकि जीप सफारी (Jeep safari) का खर्च ₹1000 से ₹1500 के बजट (Budget of 1500) में आ जाता है। पार्क के आसपास आपको ₹1200 से ₹1500 के बजट में होटल (Hotels in budget) और स्वदेशी टेंट हाउस आसानी से मिल जाएंगे। हमारी टीम ने फील्ड टूर के दौरान यहाँ के एक लोकल ढाबे (Local dhabha) पर ₹150 में पारंपरिक राजस्थानी थाली का स्वाद लिया था, जो स्वाद और जेब दोनों के लिहाज से बेहतरीन था।

गोडावण पक्षी की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं और यह उड़ने में कैसा है?

गोडावण, जिसे अंग्रेजी में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (Great Indian Bustard) कहा जाता है, दुनिया के सबसे वजनी उड़ने वाले पक्षियों (Heviest flying birds) में से एक है। इसका वजन लगभग 15 किलोग्राम तक हो सकता है। शुष्क घास के मैदानों (Dry grasslands) में रहने वाला यह पक्षी दिखने में शुतुरमुर्ग जैसा लगता है, जिसकी लंबी गर्दन और ऊंचे पैर होते हैं। भारी शरीर होने के बावजूद यह आसानी से उड़ सकता है, लेकिन यह अपना अधिकांश समय जमीन पर चलकर ही बिताता है। जैसलमेर का स्थानीय पर्यावरण (Local environment) इसके जीवित रहने के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है।

जैसलमेर में गोडावण (Great Indian Bustard) को देखने के लिए सबसे अच्छी जगह कौन सी है?

जैसलमेर में गोडावण को देखने के लिए सबसे बेहतरीन जगह डेजर्ट नेशनल पार्क (Desert National Park) है। यह राष्ट्रीय उद्यान (National Park) इस लुप्तप्राय पक्षी का मुख्य प्राकृतिक आवास (Natural habitat) है। जब हमारी टीम यहाँ के स्थानीय गाइड (Local guide) के साथ विजिट पर गई थी, तो उन्होंने हमें बताया कि पार्क के अंदर बने सुदासरी क्लोजर (Sudasari Closure) के पास सुबह या शाम के समय गोडावण को देखने की संभावना सबसे ज्यादा होती है। यहाँ आपको प्रकृति का एक बेहद खूबसूरत और शांत रूप देखने को मिलता है।

जैसलमेर की सुनहरी रेत के बीच बसे डेजर्ट नेशनल पार्क (Desert National Park) की यात्रा केवल एक आम पर्यटन नहीं, बल्कि प्रकृति के सबसे अनूठे और दुर्लभ रूपों से रूबरू होने का एक लाइफ-चेंजिंग एक्सपीरियंस (Life-changing experience) है। दुनिया के सबसे वजनी और शानदार पक्षियों में शुमार गोडावण, यानी ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (Great Indian Bustard) को उसके प्राकृतिक आवास (Natural habitat) में करीब से देखना एक ऐसा अहसास है, जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।

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