सांवरिया सेठ का चमत्कारी इतिहास (History of Sanwariya Seth Mandir)
सांवरिया सेठ की प्रतिमा का इतिहास बहुत ही अद्भुत है। लोक कथाओं के अनुसार, सन् 1840 में मण्डफिया के एक ग्वाले भोलाराम गुर्जर को सपना आया था कि बाछड़ा की छापर (भादसोड़ा) में जमीन के नीचे चार मूर्तियाँ दबी हैं। जब खुदाई की गई, तो वहाँ से भगवान कृष्ण की चार सुंदर मूर्तियाँ निकलीं। सबसे बड़ी मूर्ति को मण्डफिया (Mandaphiya) लाया गया, जहाँ आज सांवरिया सेठ का मुख्य भव्य मंदिर बना हुआ है।
मंदिर की वास्तुकला और भव्यता (Architecture of Sanwariya Seth
यह मंदिर वास्तुकला का एक बेजोड़ नमूना है। पूरे मंदिर को मकराना के सफेद संगमरमर और लाल बलुआ पत्थरों से बनाया गया है। मंदिर की दीवारों पर भगवान कृष्ण के जीवन की लीलाओं को बारीकी से उकेरा गया है।
सांवरिया सेठ मंदिर दर्शन का समय (Darshan Timings)
मंदिर भक्तों के लिए सुबह 5:30 बजे मंगला आरती के साथ खुलता है और रात 11:00 बजे तक खुला रहता है। दोपहर में राजभोग के बाद मंदिर के पट कुछ समय के लिए विश्राम हेतु बंद किए जाते हैं।
. जलझूलनी एकादशी का भव्य मेला (Jal Jhulni Ekadashi Fair)
भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को यहाँ राजस्थान का सबसे बड़ा मेला भरता है। इसे ‘जलझूलनी एकादशी’ कहा जाता है, जिसमें भगवान के विग्रह को पालकी में बिठाकर शाही स्नान के लिए ले जाया जाता है।
सांवरिया सेठ मंदिर और हमारी टीम अनुभव
हमारी टीम ने जब सांवरिया सेठ के दर्शन किए, तो हमने पाया कि यहाँ की व्यवस्थाएँ किसी कॉर्पोरेट ऑफिस से कम नहीं हैं। मंदिर की दान पेटी जब खुलती है, तो नोटों की गिनती में कई दिन लग जाते हैं।



