संत अणसी बाई नाडोल का इतिहास (Ansi Bai Nadol History in Hindi): जानिए मात्र 21 वर्ष की उम्र में जीवित समाधि लेने वाली महान मारवाड़ी बाल संत अणसी बाई की पूरी कहानी।
संत अणसी बाई नाडोल का इतिहास: फैक्ट फाइल
पूरा नाम: संत शिरोमणि बाल तपस्विनी अणसी बाई (लोक-भजनों में अपभ्रंश नाम: अनमी बाई / अनामी बाई)
जन्म तिथि: विक्रम संवत 1981, श्रावण शुक्ल पूर्णिमा (रक्षाबंधन) — 12 अगस्त 1925
जन्म स्थान: नाडोल गाँव, तहसील देसूरी, जिला पाली (राजस्थान)
माता-पिता: पिता संत श्री टुआरामजी भूंगरिया, माता श्रीमती पेमीबाई
समाज व गोत्र: मेघवंशी (मेघवाल) समाज, भूंगरिया गोत्र
आध्यात्मिक मार्ग: निर्गुण भक्ति, निज धरम लोकधारा (बाबा रामदेव जी के पद-चिह्नों पर)
दीक्षा गुरु: परम पूज्य संत श्री किशनारामजी महाराज (पूगल, अनूपगढ़ वाले)
धर्म भाई (गुरु भाई): गुड़ा अखेराज के राजपूत ठाकुर श्री केशरसिंह जी महाराज
जीवित समाधि की तिथि: विक्रम संवत 2003, मार्गशीर्ष (मंगसर) शुक्ल द्वितीया (दूज) — 25 नवंबर 1946
समाधि के समय आयु: मात्र 21 वर्ष
मुख्य मंदिर व समाधि धाम: अणसी बाई धाम, नाडोल (पाली, राजस्थान)
वार्षिक मेला/उत्सव: हर साल मंगसर सुदी दूज (नवंबर-दिसंबर) को भव्य मेला और भजन संध्या।
सबसे प्रसिद्ध भजन/कथा: “जागी रखियो रे घर ज्योत” (कथा गायक: पेमाराम जाट, जोगभारती)
अणसी बाई का जन्म और बाल्यकाल (Ansi Bai Birth & Early Life)
बाल तपस्विनी अणसी बाई का जन्म विक्रम संवत 1981 की श्रावण सुदी पूर्णिमा (रक्षाबंधन) के दिन (12 अगस्त 1925) राजस्थान के पाली जिले के नाडोल गाँव (तहसील देसूरी) में हुआ था। वे मेघवंशी समाज के भूंगरिया गोत्र से ताल्लुक रखती थीं। उनके पिता का नाम संत श्री टुआरामजी मेघवाल और माता का नाम पेमीबाई था।
बचपन से ही अणसी बाई आम बच्चों से बिल्कुल अलग थीं। खेल-कूद की उम्र में वे बाबा रामदेव जी की अनन्य भक्ति और ध्यान साधना में लीन रहती थीं।
संत अणसी बाई :गुरु दीक्षा और चमत्कारिक आध्यात्मिक यात्रा
कहा जाता है कि अणसी बाई के गुरु पूगल (अनूपगढ़) के प्रसिद्ध संत श्री किशनारामजी महाराज थे। जब अणसी बाई छोटी बच्ची थीं, तभी किशनारामजी महाराज ने उनके सिर पर हाथ रखकर भविष्यवाणी कर दी थी कि यह कन्या एक दिन अध्यात्म जगत में पूरे समाज का नाम रोशन करेगी।
अणसी बाई आडंबरों और अंधविश्वास से कोसों दूर केवल आंतरिक नाम-साधना और मानव कल्याण के मार्ग पर चलती थीं। उनके भजनों और वचनों से प्रभावित होकर केवल मेघवाल समाज ही नहीं, बल्कि सर्वसमाज के लोग उनके दर्शन के लिए उमड़ पड़ते थे।
ठाकुर केशर सिंह और अणसी बाई का रिश्ता
अणसी बाई के आध्यात्मिक तेज का एक बड़ा उदाहरण नाडोल के पास स्थित ग्राम ‘गुड़ा अखेराज’ के राजपूत श्री केशरसिंह जी थे। वे अणसी बाई की कठिन साधना से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने बाईसा को अपनी गुरु-बहन मान लिया। दोनों ने जीवनभर पवित्र भाई-बहन के रूप में रहकर बाबा रामदेव जी की निज धरम लोकधारा और निर्गुण भक्ति का प्रचार किया।
अणसी बाई की मात्र 21 वर्ष की आयु में जीवित समाधि का रहस्य (Ansi Bai Jeevit Samadhi)
राजस्थान के इतिहास में अणसी बाई की जीवित समाधि की घटना सबसे ज्यादा हैरान और भावुक करने वाली है। 25 नवंबर 1946 (विक्रम संवत 2003, मगसर सुदी दूज) को मात्र 21 वर्ष की अल्पायु में अणसी बाई ने नाडोल में जीवित समाधि लेने की घोषणा कर दी।
उपनिवेशिक दौर होने के कारण नाडोल के तत्कालीन जागीरदार ठाकुर लक्ष्मणसिंह फौजदारों और सिपाहियों के साथ घोड़ों पर सवार होकर समाधि स्थल पर पहुंचे। उन्होंने इसे आत्महत्या या हत्या का मामला मानकर समाधि को जबरन वापस खुलवा दिया।
लोक मान्यताओं के अनुसार, जब मिट्टी हटाई गई और समाधि खोली गई, तो वहाँ अणसी बाई का पार्थिव शरीर नहीं था; समाधि के भीतर केवल ताजा फूल और मालाएं ही शेष बची थीं। यह अद्भुत चमत्कार देखकर ठाकुर लक्ष्मणसिंह को गहरा पश्चाताप हुआ।
इस घटना के बाद, जब अणसी बाई के परम भक्त और भाई केशरसिंह जी महाराज को यह दुखद समाचार मिला, तो वे भी व्यथित हो गए और उसी वर्ष मगसर सुदी चौदस को उन्होंने भी जीवित समाधि धारण कर ली।
अणसी बाई धाम, नाडोल: आज भी मौजूद है आस्था का केंद्र
आज नाडोल (पाली) में अणसी बाई की समाधि पर एक भव्य श्वेत पत्थरों से निर्मित मंदिर बना हुआ है। हर साल यहाँ हजारों-लाखों श्रद्धालु मन्नतें लेकर आते हैं। मारवाड़ के विख्यात गायकों जैसे पेमाराम जाट, जोगभारती और सरिता खारवाल ने ‘अणसी बाई री कथा’ और भजनों के माध्यम से इस गौरवशाली इतिहास को घर-घर तक पहुँचाया है।
जागी रखियो रे घर ज्योत: अणसी बाई का सबसे प्रसिद्ध भजन
जब लोग सोशल मीडिया पर “अनमी बाई का भजन” या “अंभी बाई का भजन” सर्च करते हैं, तो वे असल में अणसी बाई के इसी प्रसिद्ध भजन की पंक्तियां ढूंढ रहे होते हैं। इस कथा का सबसे मुख्य और लोकप्रिय भजन जिसके बोल (Lyrics) लोग गूगल पर खोजते हैं, वह इस प्रकार है:
“जागी रखियो रे घर ज्योत, अणसी बाई री कथा सुणो भाई…””नाडोल नगरी में परचो दीन्हो, बाल तपोसी अणसी माई…”
यदि आप भी इस भजन के दीवाने हैं, तो आपको बता दें कि यह भजन अध्यात्म और आत्म-जागरण का संदेश देता है, जिसे मारवाड़ के हर जागरण में बड़े चाव से गाया जाता है।
अणसी बाई री कथा: पेमाराम जाट और जोगभारती के भजनों का सच
इंटरनेट पर “अणसी बाई री कथा” सर्च करने वाले लोग सबसे ज्यादा इसके ऑडियो और वीडियो वर्जन ढूंढते हैं। राजस्थान के प्रसिद्ध लोक गायकों ने इस अमर इतिहास को संगीत के माध्यम से जीवित रखा है:
• पेमाराम जाट अणसी बाई री कथा (भाग 1 व 2): लोक गायक पेमाराम जाट जी की आवाज में गाई गई “अणसी बाई री कथा” (भाग 1 और भाग 2) यूट्यूब पर सबसे ज्यादा लोकप्रिय है। उन्होंने बहुत ही सरल मारवाड़ी भाषा में बाईसा के जन्म से लेकर उनकी जीवित समाधि तक के प्रसंग को समझाया है।
• जोगभारती और सरिता खारवाल की जुगलबंदी: मारवाड़ी देसी भजनों के सम्राट जोगभारती और गायिका सरिता खारवाल द्वारा गाई गई अणसी बाई री कथा और अराश (भजन संध्या) को लोग आज भी बड़ी श्रद्धा के साथ सुनते हैं।
• अणसी बाई री कथा मारवाड़ी देसी भजन: पुराने ढोलक, मंजीरे और तंबूरे की थाप पर गाए जाने वाले इन भजनों को ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी रातीजगा और जागरणों में मुख्य रूप से गाया जाता है।
अणसी बाई धाम नाडोल कहाँ है और कैसे पहुँचें? (Travel Guide to Nadol Dham)
अगर आप भी संत शिरोमणि अणसी बाई की पवित्र जीवित समाधि के दर्शन करना चाहते हैं, तो आपको नाडोल गाँव (तहसील देसूरी, जिला पाली, राजस्थान) आना होगा। यह स्थान अरावली की पहाड़ियों और ऐतिहासिक स्थलों से घिरा हुआ है। यहाँ पहुँचने का सही रास्ता इस प्रकार है:
• सड़क मार्ग द्वारा (By Road): नाडोल गाँव पाली-उदयपुर राज्य राजमार्ग पर स्थित है। यह पाली शहर से लगभग 65 किलोमीटर और रणकपुर जैन मंदिर से मात्र 40 किलोमीटर की दूरी पर है। जोधपुर, उदयपुर और जयपुर से नाडोल के लिए सीधी बसें उपलब्ध हैं।
रेलवे मार्ग द्वारा (By Train): नाडोल धाम का सबसे नजदीकी मुख्य रेलवे स्टेशन फालना (Falna – FA) और रानी (Rani – RANI) है। यहाँ से मंदिर की दूरी लगभग 30 से 35 किलोमीटर है, जहाँ से आप लोकल टैक्सियों या बसों के जरिए आसानी से नाडोल पहुँच सकते हैं।
• हवाई मार्ग द्वारा (By Flight): सबसे निकटतम हवाई अड्डा जोधपुर (Jodhpur Airport) और उदयपुर (Maharana Pratap Airport) हैं, जो यहाँ से करीब 130-140 किलोमीटर दूर हैं।
नाडोल में अणसी बाई का मेला कब लगता है? (Ansi Bai Mela Dates)
हर साल मार्गशीर्ष मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को नाडोल धाम में संत अणसी बाई का विशाल वार्षिक मेला (वार्षिक उत्सव) भरता है। इसे स्थानीय भाषा में “मगसर सुदी दूज” कहा जाता है।
मेले का मुख्य आकर्षण: इस पवित्र अवसर पर नाडोल धाम में एक भव्य मेला लगता है और एक बहुत बड़ी भजन संध्या (महाजागरण) का आयोजन किया जाता है। इसमें राजस्थान के नामी लोक कलाकार (जैसे पेमाराम जाट और जोगभारती की मंडली) रातभर अणसी बाई री कथा और मारवाड़ी देसी भजनों की प्रस्तुति देते हैं।
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