खाटू श्याम जी दर्शन शुभ मुहूर्त का गुप्त ज्योतिष रहस्य: किस तिथि और नक्षत्र में जाने से रातों-रात चमकती है सोई किस्मत?

खाटू श्याम जी दर्शन शुभ मुहूर्त जानना जरूरी है यदि आप भी बाबा श्याम के दर्शन की योजना बाना रहे हैं । सामान्य दिनों के बजाय ज्योतिषीय रूप से सिद्ध और फलदायी मुहूर्तों में जाएं। आइए जानते हैं खाटू श्याम जी के दर्शन के लिए सबसे उत्तम तिथि, नक्षत्र और दिशा विज्ञान का पूरा रहस्य।

खाटू श्याम दर्शन के लिए शुभ तिथि कौन सी है? Khatu shyam shubh muhurat

वैसे तो हर तिथि मंगलकारी है, लेकिन बाबा के दरबार में निम्नलिखित दो तिथियों पर हाजिरी लगाने का पुण्य फल कई गुना बढ़ जाता है:

शुक्ल पक्ष की एकादशी: हर महीने की शुक्ल पक्ष की एकादशी बाबा श्याम के दर्शन के लिए सबसे उत्तम तिथि मानी जाती है। इसका सीधा संबंध भगवान विष्णु से है।

कार्तिक शुक्ल एकादशी: यह बाबा श्याम का जन्मोत्सव का दिन है। इस दिन दर्शन करने से कुंडली के पितृदोष हमेशा के लिए शांत हो जाते हैं और दुर्भाग्य दूर होता है।

फाल्गुन शुक्ल द्वादशी: इस तिथि पर रींगस से खाटू धाम तक निशान (ध्वज) चढ़ाने से वंश वृद्धि होती है और संतान संबंधी कष्ट दूर होते हैं।

खाटू श्याम जी जाने का शुभ दिन कौन सा है?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बुधवार और गुरुवार का दिन सर्वश्रेष्ठ है।बुधवार: यह बुद्धि और प्रगति (कृष्ण तत्व) का दिन है। यह मुख्य रूप से विद्यार्थियों और व्यापारियों के लिए विशेष फलदायी है।गुरुवार: यह दिन गुरु कृपा, आध्यात्मिक उन्नति और सुख-समृद्धि लाता है।नोट: शनिवार और रविवार को अत्यधिक भीड़ होती है, इसलिए शांति से दर्शन के लिए ये दो दिन सबसे व्यावहारिक भी हैं।

इन ३ नक्षत्रों में करें खाटू श्याम बाबा दर्शन, रातों-रात बदलेगा भाग्य खाटू श्याम जी दर्शन शुभ मुहूर्त

श्रवण नक्षत्र में खाटू श्याम जी दर्शन (Shravana Nakshatra): इस नक्षत्र के स्वामी स्वयं चंद्र देव हैं और इसके अधिपति देवता भगवान विष्णु हैं। जब भी एकादशी पर श्रवण नक्षत्र का संयोग बने, तो खाटू धाम जरूर जाएं। यह आपके मान-सम्मान और व्यापार में वृद्धि कराता है।

रोहिणी नक्षत्र (Rohini Nakshatra): भगवान श्रीकृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। चूंकि श्याम बाबा को कृष्ण का ही वरदान प्राप्त है, इसलिए रोहिणी नक्षत्र में किए गए दर्शन से कर्ज से मुक्ति मिलती है।

पुष्य नक्षत्र (Pushya Nakshatra): इसे नक्षत्रों का राजा कहा जाता है। रवि-पुष्य या गुरु-पुष्य योग के दिन खाटू श्याम जी की चौखट पर माथा टेकने से राहु-केतु और शनि की महादशा का कुप्रभाव शांत होता है।

खाटू श्याम दर्शन का शुभ पहर / प्रहर कौन सा है?

प्रथम प्रहर (ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 4:00 से 6:00 बजे): इस समय बाबा का मंगला शृंगार और आरती होती है। इस पहर में मंदिर परिसर की दिव्य ऊर्जा चरम पर होती है।सांयकाल प्रहर (शाम 6:00 से रात 8:00 बजे): संध्या आरती के इस प्रहर में दर्शन करने से मानसिक तनाव दूर होता है और सुख की प्राप्ति होती है।

खाटू श्याम दर्शन के लिए सर्वश्रेष्ठ चौघड़िया तालिका

अपनी यात्रा या दर्शन की शुरुआत करते समय हमेशा अमृत, शुभ और लाभ इन तीन चौघड़ियों को प्राथमिकता देनी चाहिए। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जहाँ अमृत चौघड़िया सभी प्रकार के कार्यों की सिद्धि और परम मानसिक शांति प्रदान करता है, वहीं शुभ चौघड़िया को यात्रा की निर्विघ्न पूर्णता और सौभाग्य वृद्धि के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। इसके अलावा, यदि आप एक व्यापारी हैं या अपने करियर में उन्नति की चाह रखते हैं, तो लाभ चौघड़िया में अपनी यात्रा शुरू करना आपके लिए सबसे भाग्यशाली साबित होगा। हालांकि, इस दौरान यह विशेष ध्यान रखें कि राहुकाल के समय भूलकर भी यात्रा की शुरुआत या बाबा के दर्शन न करें, क्योंकि इस काल में किए गए कार्य बाधा उत्पन्न कर सकते हैं।

खाटू श्याम जी यात्रा: वास्तु शास्त्र और यात्रा के गुप्त नियम

यात्रा शुरू करने की दिशा: यदि आप अपने घर से निकल रहे हैं, तो कोशिश करें कि उत्तर (North) या ईशान कोण (North-East) की तरफ मुंह करके यात्रा की शुरुआत करें।

मंदिर में प्रवेश और वास्तु: जब आप मुख्य परिसर में प्रवेश करें, तो ध्यान रखें कि दर्शन करते समय आपका मुख पूर्व (East) या उत्तर (North) दिशा की ओर होना चाहिए।

श्याम कुंड का वास्तु नियम: मंदिर परिसर के पास स्थित पवित्र ‘श्याम कुंड’ वास्तु के अनुसार उत्तर-पूर्व (ईशान) क्षेत्र में आता है। मंदिर जाने से पहले इस कुंड के जल के छीटें अपने सिर पर अवश्य मारें, इससे शरीर का आभामंडल (Aura) शुद्ध होता है

खाटू श्याम FAQ

रींगस से खाटू पैदल यात्रा का शुभ मुहूर्त और निशान चढ़ाने के नियम

रींगस से खाटू पैदल निशान यात्रा शुरू करने के लिए ज्योतिष और व्यावहारिक दृष्टिकोण से शाम का चौथा प्रहर (शाम 4:00 से रात 7:00 बजे) सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इस समय प्रस्थान करने से भक्त रात की शीतलता में भजन-कीर्तन करते हुए आराम से 18 किलोमीटर की यात्रा पूरी कर लेते हैं। यदि आप दिन में निकलना चाहते हैं, तो पंचांग में अमृत या शुभ का चौघड़िया देखकर ही पहला कदम आगे बढ़ाएं। शाम को शुरू हुई यह यात्रा सुबह के प्रथम प्रहर (मंगला आरती मुहूर्त) तक खाटू धाम पहुँच जाती है, जिसे दर्शन के लिए सबसे जागृत समय माना गया है। वहीं, निशान चढ़ाने की सबसे उत्तम तिथि हर महीने की शुक्ल पक्ष की एकादशी और द्वादशी है, जिसमें फाल्गुन मास का महत्व सबसे ऊपर है।

खाटू श्याम मंगला आरती का शुभ मुहूर्त समय क्या है?”

गर्मियों में बाबा की मंगला आरती अलसुबह ४:३० बजे और सर्दियों में (अक्टूबर से मार्च) सुबह ५:३० बजे होती है। इसी प्रहर को दर्शन के लिए सबसे जागृत माना गया है।

खाटू श्याम निशान चढ़ाने की सबसे उत्तम तिथि कौन सी है?

वैसे तो साल के बारह महीने भक्त निशान चढ़ाते हैं, लेकिन निशान चढ़ाने की सबसे उत्तम तिथि हर महीने की शुक्ल पक्ष की एकादशी (ग्यारस) और द्वादशी मानी जाती है। इसमें भी फाल्गुन शुक्ल एकादशी और द्वादशी का महत्व सबसे ऊपर है, क्योंकि इसी तिथि पर स्वयं वीर बर्बरीक ने भगवान श्रीकृष्ण को अपने शीश का दान दिया था और कृष्ण ने उन्हें कलयुग में अपने नाम ‘श्याम’ से पूजे जाने का वरदान दिया था।

रींगस से खाटू पैदल यात्रा शुरू करने का सबसे अच्छा समय क्या है?

पैदल यात्रा शुरू करने के लिए शाम 4:00 बजे से रात 7:00 बजे (चौथा प्रहर) का समय सबसे उत्तम है, ताकि रात की शीतलता में यात्रा सुबह मंगला आरती तक पूरी हो सके। दिन में यात्रा शुरू करने के लिए अमृत या शुभ का चौघड़िया देखें।

खाटू श्याम जी दर्शन शुभ मुहूर्त पर लिखा यह आर्टिकल आपको कैसा लगा? खाटू श्याम जी की जय।

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