कोटा का भीमगढ़ महल(अभेड़ा महल कोटा): इतिहास, रहस्य और इसे हाड़ौती का हवामहल क्यों कहते हैं?

अभेड़ा महल कोटा ( भीमगढ़ महल) को हाड़ौती का हवामहल क्यों कहते हैं? जानिए इस ऐतिहासिक महल की खास वास्तुकला, हवादार झरोखे और इसके निर्माण से जुड़ा अनोखा इतिहास।

हाड़ौती का हवामहल किसे कहते हैं:

हाड़ौती का हवामहल राजस्थान के कोटा जिले में स्थित अभेड़ा महल को कहा जाता है. यह खूबसूरत महल चम्बल नदी के किनारे स्थित है. इसका निर्माण कोटा के महाराव अभयसिंह हाड़ा ने करवाया था.मुख्य रूप से यह महल अपने सुंदर जलाशयों, बगीचों और कतरनी नक्काशीदार झरोखों के लिए प्रसिद्ध है. महल परिसर में राजकुमारी धीरदेह ने एक कृत्रिम तालाब बनवाया था, जिसमें प्राचीन काल में मगरमच्छ पाले जाते थे. जयपुर के मूल हवामहल की तरह हवादार खिड़कियों और अनोखी वास्तुकला के कारण इसे हाड़ौती अंचल का हवामहल कहते हैं.

अभेड़ा महल कोटा का इतिहास:

अभेड़ा महल राजस्थान के कोटा जिले में चम्बल नदी के किनारे स्थित एक ऐतिहासिक धरोहर है। इसका निर्माण 18वीं शताब्दी में कोटा के शासक महाराव अभयसिंह हाड़ा ने करवाया था। यह महल हाड़ौती क्षेत्र की बेहतरीन वास्तुकला और स्थापत्य कला का एक अद्भुत उदाहरण है।इस महल परिसर में एक बेहद खूबसूरत तालाब है, जिसका निर्माण राजकुमारी धीरदेह ने करवाया था। प्राचीन काल में इस कृत्रिम जलाशय में पालतू मगरमच्छों को रखा जाता था, जिन्हें देखने स्वयं राजा-महाराजा आते थे। अपनी सुंदर और हवादार खिड़कियों के कारण इसे ‘हाड़ौती का हवामहल’ भी कहा जाता है।

अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क कोटा

अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क कोटा में चम्बल नदी और ऐतिहासिक अभेड़ा महल के पास स्थित राजस्थान का एक आधुनिक जैविक उद्यान है। लगभग 126 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले इस पार्क का उद्घाटन जनवरी 2022 में किया गया था। यह पार्क हाड़ौती क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है।यहाँ पर्यटकों को शेर, बाघ, पैंथर, भालू, भेड़िये और विभिन्न प्रकार के पक्षी व रेंगने वाले जीव देखने को मिलते हैं। जीवों के लिए यहाँ उनके प्राकृतिक आवास जैसा माहौल तैयार किया गया है। प्रकृति प्रेमियों और बच्चों के लिए यह कोटा का एक बेहतरीन पर्यटन स्थल है।

Abheda Mahal & Biological Park: अभेड़ा महल कोटा टाइमिंग और टिकट लिस्ट

अभेड़ा महल और बायोलॉजिकल पार्क पास-पास होने के कारण कोटा आने वाले पर्यटकों के पसंदीदा स्थल हैं। चम्बल किनारे स्थित अभेड़ा महल सप्ताह के सभी दिन सुबह 6:00 से शाम 6:00 बजे तक खुला रहता है, जहां का टिकट मात्र ₹10 से ₹20 है। वहीं, वन्यजीवों से घिरा बायोलॉजिकल पार्क सुबह 8:30 से शाम 5:30 बजे तक खुलता है, जिसका टिकट भारतीयों के लिए ₹52 और छात्रों के लिए ₹22 है। ध्यान रहे कि बायोलॉजिकल पार्क हर मंगलवार को बंद रहता है, इसलिए वीकेंड पर यहाँ आना सबसे बेहतर विकल्प है।

अभेड़ा महल कोटा बोटिंग टिकट प्राइस (Abheda Mahal Boating Ticket Price)

महल के सामने स्थित खूबसूरत कमल के तालाब में पर्यटकों के लिए पैडल बोटिंग की सुविधा उपलब्ध है।चार्जेस (किराया): बोटिंग का शुल्क बेहद किफायती है, जो लगभग ₹20 से ₹50 प्रति व्यक्ति (समय और बोट के प्रकार के अनुसार) रहता है。खास आकर्षण: बोटिंग करते समय तालाब में खिले सुंदर कमल के फूल और पानी में तैरते कछुए पर्यटकों को खूब आकर्षित करते हैं।

अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क क्लोजर डे (Weekly Closure Day)

यदि आप दोनों जगह एक साथ घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो इस दिन का विशेष ध्यान रखें:साप्ताहिक अवकाश: अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क हर मंगलवार (Tuesday) को पूरी तरह बंद रहता है।टिप: मंगलवार को साप्ताहिक रखरखाव (Maintenance) और वन्यजीवों के आराम के लिए पार्क बंद रखा जाता है, हालांकि ऐतिहासिक अभेड़ा महल मंगलवार को भी खुला रहता है।

कोटा रेलवे स्टेशन से अभेड़ा महल की दूरी और रूट (Distance & Route)

सटीक दूरी: कोटा जंक्शन (रेलवे स्टेशन) से अभेड़ा महल की कुल दूरी सड़क मार्ग से लगभग 10 से 14 किलोमीटर है (रूट के आधार पर 30 मिनट का समय लगता है)।

आने-जाने का साधन (Transport): रेलवे स्टेशन से बाहर निकलते ही आपको सीधे अभेड़ा महल या नांता रोड के लिए ऑटो-रिक्शा, ई-रिक्शा और लोकल टैक्सी आसानी से मिल जाती हैं।अनुमानित किराया: ऑटो का एक तरफ का सामान्य किराया लगभग ₹150 से ₹250 तक होता है (यदि आप पूरा ऑटो बुक करते हैं)।

अभेड़ा महल का निर्माता कौन था? (ऐतिहासिक संदर्भ)

तालाब का निर्माण: महल के सामने स्थित प्रसिद्ध अभेड़ा तालाब का निर्माण सन् 1346 में राजकुमार धीरदेह के शासनकाल में हुआ था.

महल का निर्माण (महाराव उम्मेद सिंह द्वितीय): वर्तमान में जो तीन मंजिला भव्य महल दिखाई देता है, उसका निर्माण मुख्य रूप से 18वीं शताब्दी में कोटा के महाराव उम्मेद सिंह द्वितीय (1889-1940) के काल में हुआ था। उन्होंने शाही परिवार और उनके मेहमानों के मनोरंजन, शिकार और आरामगाह (Pleasure Palace) के रूप में इसका विस्तार किया.

महाराव अभयसिंह हाड़ा: स्थानीय जनश्रुतियों और कुछ इतिहास की पुस्तकों में शुरुआती गढ़ (शिकारगाह की बुर्जियों) का श्रेय महाराव अभयसिंह हाड़ा को भी दिया जाता है, लेकिन प्रामाणिक तौर पर आधुनिक महल रूप उम्मेद सिंह द्वितीय के समय ही निखरा.

अभेड़ा महल कोटा के मगरमच्छों की अनसुनी कहानी

यह तालाब ऐतिहासिक रूप से अपने खूंखार और वफादार जीवों के लिए जाना जाता था:पालतू मगरमच्छ: महाराव उम्मेद सिंह द्वितीय के शासनकाल के दौरान अभेड़ा तालाब में मगरमच्छों को पालतू जीवों (Pets) की तरह रखा जाता था.आवाज पर आते थे बाहर: इतिहास के अनुसार, इन मगरमच्छों के बाकायदा नाम रखे गए थे। जब महल के कर्मचारी या राजा उन्हें विशेष आवाज देकर पुकारते थे, तो वे पानी से बाहर आकर राजा के हाथों या शाही रसोइयों द्वारा फेंका गया भोजन (मांस) खाते थे। यह दृश्य देखने विदेशी मेहमान भी यहाँ आते थे।

अभेड़ा महल कोटा का म्यूजियम और कलाकृतियाँ

हाड़ौती शैली के भित्तिचित्र (Frescoes): महल के कमरों और दीर्घाओं में हाड़ौती (कोटा-बूंदी) शैली की अद्भुत चित्रकारी देखने को मिलती है। इनमें प्राकृतिक रंगों से शिकार के दृश्य, राजसी वैभव, सघन जंगल और यहाँ की समृद्ध वनस्पतियों व जीवों (Flora and Fauna) को दर्शाया गया है।हथियारों की गैलरी और पेंटिंग्स: यहाँ तत्कालीन राजपूत राजाओं द्वारा शिकार में उपयोग किए जाने वाले पारंपरिक हथियार (तलवारें, ढाल, बंदूकें) प्रदर्शित हैं। साथ ही राधा-कृष्ण के रास और राजपूताना संस्कृति को दर्शाती मिनिएचर पेंटिंग्स (लघु चित्र) सैलानियों का मन मोह लेती हैं।

अभेड़ा महल प्री-वेडिंग शूट प्राइस (Pre-wedding Shoot Price)

यह स्थान राजस्थान में कम बजट में एक बेहतरीन हेरिटेज और रॉयल प्री-वेडिंग शूट (Heritage Photoshoot) के लिए सबसे बेस्ट माना जाता है.शूट की अनुमति और फीस: ऐतिहासिक अभेड़ा महल परिसर में सामान्य प्री-वेडिंग फोटोशूट के लिए कोई बहुत भारी कमर्शियल चार्ज नहीं लिया जाता है। सामान्य एंट्री टिकट (₹10 से ₹20 प्रति व्यक्ति) के साथ पेशेवर कैमरा/DSLR ले जाने के लिए ₹50 का अतिरिक्त कैमरा शुल्क देना होता है.विशेष नोट: निजी स्टूडियो सेटिंग्स (जैसे पास के Pixo Kota आदि) की तरह यहाँ हजारों रुपये की फीस नहीं है, यह सरकारी नियमों के तहत बहुत ही बजट-फ्रेंडली है. हालांकि, बड़े पैमाने पर वीडियो क्रू या ड्रोन उड़ाने के लिए स्थानीय प्रशासन (नगर निगम/पुरातत्व विभाग) से विशेष अनुमति की आवश्यकता हो सकती है.

अभेड़ा महल सनसेट पॉइंट (Sunset Point & Photography)

गोल्डन ऑवर (Golden Hour): शाम 4:30 बजे से 6:00 बजे के बीच का समय फोटोग्राफी के लिए सबसे उत्तम है.

विजुअल रिफ्लेक्शन (Reflection View): डूबते सूरज की किरणें जब महल के पीले बलुआ पत्थर (Yellow Sandstone) पर पड़ती हैं, तो पूरा महल सोने की तरह चमक उठता है. इस समय तालाब के शांत पानी और खिले हुए कमल के फूलों के बीच जब महल का प्रतिबिंब (Reflection) बनता है, तो वह अद्भुत ‘मेल्टिंग गोल्डन’ शॉट देता है जो इंस्टाग्राम रील्स और प्री-वेडिंग के लिए परफेक्ट है.

कोटा में लेकसाइड पिकनिक स्पॉट्स (Lakeside Picnic Spots in Kota)

अभेड़ा महल तालाब परिसर (Abheda Mahal Pond):खासियत: शहर की भीड़भाड़ से दूर, बेहद शांत और प्राचीन राजपूत वास्तुकला से घिरा हुआ क्षेत्र है.एक्टिविटीज: यहाँ बने बगीचे में बैठ सकते हैं, बच्चों के लिए छोटा पार्क है और तालाब में कछुओं को देखते हुए पैडल बोटिंग का आनंद ले सकते हैं.

किशोर सागर तालाब और जगमंदिर (Kishor Sagar Talab):खासियत: यह कोटा शहर के बीचों-बीच स्थित एक बेहद खूबसूरत और शानदार झील है.एक्टिविटीज: तालाब के बीच बने ऐतिहासिक जगमंदिर महल का नजारा, शाम को शानदार लाइटिंग, लेकसाइड वॉकवे पर घूमना और पास ही स्थित ‘सेवन वंडर्स पार्क’ का दीदार.

चम्बल रिवरफ्रंट और चम्बल गार्डन (Chambal Riverfront & Garden):खासियत: चम्बल नदी के किनारे बने आधुनिक और विश्वस्तरीय घाट और हरा-भरा पुराना चम्बल गार्डन.एक्टिविटीज: नदी के किनारे सुंदर रास्तों पर टहलना, सस्पेंशन ब्रिज देखना और नदी के किनारे पिकनिक मनाना.

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