मीराबाई की पावन नगरी: मेड़ता सिटी का इतिहास और 5 सबसे खूबसूरत जगहें

मेड़ता सिटी का इतिहास: जानें राव दूदा के गढ़, वीर जयमल मेड़तिया के शौर्य और कृष्ण दीवानी संत मीराबाई की पावन जन्मस्थली मेड़ता का गौरवशाली और रोचक इतिहास।

मेड़ता सिटी का इतिहास (History of Merta City)

प्राचीन नाम और स्थापना: मेड़ता का प्राचीन नाम ‘मेदांतक’ था। आठवीं शताब्दी में यह प्रतिहारकालीन राजा नागभट्ट द्वितीय की राजधानी रहा। बाद में यहाँ जैन समुदाय की बहुलता होने के कारण इसे ‘मेदिनीपुर’ भी कहा गया।

मेड़तिया राठौड़ राजवंश: 15वीं शताब्दी (लगभग 1460 ई.) में जोधपुर के संस्थापक राव जोधा ने यह क्षेत्र अपने पुत्र राव दूदा को जागीर के रूप में दिया। राव दूदा के वंशज ही आगे चलकर ‘मेड़तिया राठौड़’ कहलाए। राव दूदा ने यहाँ महलों, तालाबों और प्रसिद्ध चारभुजा नाथ मंदिर का निर्माण करवाया।

मीराबाई का संबंध: राव दूदा के पोते राव वीरमदेव थे और वीरमदेव की भतीजी (रतन सिंह की पुत्री) मीराबाई थीं, जिनका बचपन इसी मेड़ता की माटी में कृष्ण भक्ति करते हुए बीता।

ऐतिहासिक युद्ध और संघर्ष: रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होने के कारण मेड़ता ने कई युद्ध देखे। मारवाड़ के राजा मालदेव ने वीरमदेव से मेड़ता छीनकर यहाँ मालकोट किले का निर्माण करवाया था। यह शहर शेरशाह सूरी, मुगलों (अकबर और औरंगज़ेब) और मराठों के अधीन भी रहा।

गौरवशाली तथ्य: मेड़ता के इतिहासकार इस बात पर गर्व करते हैं कि मेड़तिया राजवंश ने कभी भी मुगलों के साथ वैवाहिक संबंध स्वीकार नहीं किए। प्रसिद्ध चित्तौड़गढ़ युद्ध के नायक वीर जयमल मेड़तिया (मीराबाई के भाई) यहीं के शासक थे।

मेड़ता सिटी के प्रमुख दर्शनीय स्थल (Famous Places to Visit in merta city)

श्री चारभुजा नाथ मंदिर (मीराबाई मंदिर): यह मेड़ता शहर के केंद्र में स्थित 400 साल से भी अधिक पुराना और सबसे मुख्य मंदिर है। मान्यता है कि इसी मंदिर में मीराबाई भगवान कृष्ण की भक्ति में लीन रहती थीं। यहाँ की शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा पर्यटकों को बेहद आकर्षित करती है।

भंवाल माता मंदिर (Bhanwal Matta Temple): मेड़ता सिटी से लगभग 25 किमी दूर स्थित इस मंदिर का इतिहास बेहद दिलचस्प है। लोक मान्यताओं के अनुसार, यहाँ माता की मूर्ति साक्षात ढाई प्याला मदिरा (wine) ग्रहण करती हैं।

औरंगज़ेब की मस्जिद व प्राचीन शिव मंदिर: इतिहास के उतार-चढ़ाव को दर्शाती यह जगह भी पर्यटकों के कौतूहल का विषय है, जहाँ मुग़ल काल की वास्तुकला देखने को मिलती है।

मीराबाई स्मारक / राव दूदा गढ़ (Meera Bai Smarak) )MuseumClosedMerta, Rajasthanराव दूदा के प्राचीन किले को अब एक खूबसूरत संग्रहालय और स्मारक में बदल दिया गया है। यहाँ चित्रों, मूर्तियों और शिलालेखों के माध्यम से मीराबाई के पूरे जीवन चरित्र और मेड़ता के इतिहास को सजीव रूप में दर्शाया गया है।

मालकोट का किला:राजा मालदेव द्वारा बनवाया गया यह किला अब खंडहर के रूप में मौजूद है, लेकिन यह राजपूत सैन्य वास्तुकला की गवाही देता है।

कैप्टन डी बॉरबन की कब्र :डागोलाई तालाब के पास स्तिंदिया की सेना के फ्रांसीसी कमांडर कैप्टन डी बॉरबन की कब्र है, जिनकी मृत्यु मेड़ता के ऐतिहासिक युद्ध में हुई थी।

मीरा द्वार और चारभुजा द्वार: शहर में प्रवेश करते ही आपको बड़े और नक्काशीदार ऐतिहासिक प्रवेश द्वार (जैसे चारभुजा द्वार और मीरा द्वार) देखने को मिलते हैं जो इस नगरी की भव्यता दर्शाते हैं।

मेड़ता कृषि मंडी (Merta Mandi) क्यों प्रसिद्ध है और यहाँ क्या मुख्य फसलें बिकती हैं?

मेड़ता सिटी केवल अपने इतिहास के लिए ही नहीं, बल्कि राजस्थान की सबसे बड़ी और आधुनिक कृषि उपज मंडियों में से एक होने के लिए भी देश भर में प्रसिद्ध है। पश्चिमी राजस्थान का यह क्षेत्र कृषि आधारित व्यापार का एक बहुत बड़ा केंद्र है। मेड़ता मंडी मुख्य रूप से उच्च गुणवत्ता वाले जीरा (Cummin Seeds), मूंग (Green Gram), सौंफ (Fennel Seeds), ग्वार और रायड़ा (मस्टर्ड) के व्यापार के लिए जानी जाती है। यहाँ के जीरे और सौंफ की मांग पूरे भारत के साथ-साथ विदेशों में भी रहती है। दैनिक रूप से हजारों किसान और व्यापारी फसलों की खरीद-बिक्री के लिए यहाँ आते हैं।

मेड़ता सिटी कैसे पहुँचें? यहाँ का नजदीकी रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डा कौन-सा है?

मेड़ता सिटी पहुँचने के लिए सड़क और रेल मार्ग सबसे अच्छे माध्यम हैं। इसका नजदीकी और प्रमुख रेलवे जंक्शन मेड़ता रोड (Merta Road Junction – MTR) है, जो मुख्य मेड़ता सिटी से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित है। यह जंक्शन जोधपुर, जयपुर, बीकानेर और दिल्ली जैसे देश के सभी बड़े शहरों से सीधी ट्रेनों द्वारा अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। मेड़ता रोड से मेड़ता सिटी के लिए स्थानीय ऑटो, टैक्सियाँ और बसें चौबीसों घंटे आसानी से उपलब्ध रहती हैं। यदि आप हवाई मार्ग से आना चाहते हैं, तो सबसे नजदीकी हवाई अड्डा जोधपुर एयरपोर्ट (JDH) है, जो यहाँ से लगभग 135 किलोमीटर दूर है। जयपुर का अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा यहाँ से लगभग 210 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। अजमेर और जोधपुर से नियमित बस सेवाएं भी उपलब्ध हैं।

मेड़ता सिटी में रुकने के लिए बेस्ट होटल्स और धर्मशालाएं

मेड़ता सिटी में ठहरने के लिए बजट से लेकर प्रीमियम सुविधाओं तक के कई बेहतरीन विकल्प उपलब्ध हैं। चारभुजा मंदिर और बस स्टैंड के पास स्थित हिंदू धर्मशाला सबसे सस्ती जगहों में से एक है, जो कम खर्च में बुनियादी कमरे या हॉल की तलाश करने वाले यात्रियों के लिए एकदम सही है। वहीं, आरामदायक और प्रीमियम प्रवास के लिए सिविल लाइंस में स्थित होटल क्लेटन इन (Hotel Clayton Inn) एक शानदार विकल्प है, जहाँ लगभग ₹2,370 की दर में बेहतरीन सर्विस और साफ-सफाई मिलती है। इसके अलावा, मुख्य शहर से 15 किमी दूर मेड़ता रोड जंक्शन के पास रुकने के लिए 108 श्री फलवृद्धि पार्श्वनाथ जैन देरासर तीर्थ एक पवित्र स्थान है, जहाँ ठहरने के सुंदर कमरे और शुद्ध भोजनशाला की व्यवस्था है, जबकि स्टेट हाईवे पर स्थित होटल विद्या पैलेस (Hotel Vidhya Palace) भी बजट-फ्रेंडली दरों में एक अच्छा और सुविधाजनक विकल्प है।

चारभुजा मंदिर मेड़ता सिटी के पास बेस्ट रेस्टोरेंट और राजस्थानी स्वाद (Restaurants near Charbhuja Temple)

मेड़ता सिटी में चारभुजा नाथ मंदिर के दर्शन के बाद भोजन और स्वादिष्ट नाश्ते के लिए कई बेहतरीन विकल्प उपलब्ध हैं। अजमेर रोड पर स्थित स्वाद रेस्टोरेंट (SWAD RESTAURANT) अपने शुद्ध शाकाहारी भोजन, पारिवारिक माहौल और बेहतरीन साफ-सफाई के लिए प्रसिद्ध है。 वहीं, क्लेटन इन होटल परिसर का उम्मेद रेस्टोरेंट (Ummed Restaurant) अपनी लाजवाब काजू करी, पनीर डिशेज और बेहतरीन एम्बिएंस के लिए जाना जाता है。 सुबह या शाम के नाश्ते के लिए नगरपालिका के सामने स्थित 56 भोग स्वीट्स (56 Bhog Sweets) सबसे बेस्ट है, जहाँ जोधपुर के प्रसिद्ध गरमा-गरम प्याज की कचौरी और मिर्ची बड़े मिलते हैं। इसके अलावा, स्टेशन रोड पर स्थित वैभव श्री होटल (Vaibhav Shree Hotel) अपने लाजवाब देसी स्वाद जैसे कि सेव प्याज, दाल तड़का और तंदूरी रोटी के लिए यात्रियों के बीच काफी लोकप्रिय है।

मालकोट किला मेड़ता सिटी का इतिहास क्या है और इसे किसने बनवाया था?

मालकोट किले का निर्माण 16वीं शताब्दी (लगभग 1530-1540 ईस्वी) में मारवाड़ (जोधपुर) के प्रतापी राजा राव मालदेव ने करवाया था। राव मालदेव ने मेड़ता के तत्कालीन शासक वीरमदेव मेड़तिया को युद्ध में हराकर इस क्षेत्र पर अधिकार कर लिया था और अपनी सैन्य शक्ति को मजबूत करने के लिए इस अभेद्य किले का निर्माण करवाया। उनके नाम पर ही इसे ‘मालकोट’ कहा गया। यह किला रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण था क्योंकि यह मारवाड़ की सीमा की सुरक्षा करता था। हालांकि, बाद में शेरशाह सूरी की सहायता से वीरमदेव के पुत्र जयमल मेड़तिया ने इस किले पर पुनः अधिकार कर लिया। यह किला राजपूतों के अदम्य साहस, आंतरिक संघर्ष और मुगलों के खिलाफ लड़ी गई कई ऐतिहासिक लड़ाइयों का मूक गवाह रहा है।

“मल्कोट दुर्ग कहाँ स्थित है?”( “Which fort is known as Malkot?”)

मालकोट दुर्ग राजस्थान के नागौर जिले के मेड़ता सिटी में स्थित है। प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर सीधे पूछा जाता है कि ‘मालकोट नाम से किस किले को जाना जाता है’ या ‘यह किस जिले में है’, जिसका सही उत्तर मेड़ता (नागौर) है। इस ऐतिहासिक किले का निर्माण मारवाड़ के प्रतापी राजा राव मालदेव ने करवाया था।

मालकोट दुर्ग क्यों बंद/खंडहर हो गया?:

मालकोट दुर्ग निरंतर सैन्य आक्रमणों, मुगलों और मराठों के लंबे संघर्ष और रणनीतिक उपेक्षा के कारण खंडहर हो गया। मेड़ता का राजनीतिक केंद्र बदलने और आजादी के बाद राजघरानों की रियासतें समाप्त होने से इसकी देखरेख बंद हो गई। समय के साथ मरम्मत न होने से यह ऐतिहासिक किला आज पूरी तरह खंडहर में तब्दील हो गया।

वीर जयमल मेड़तिया कौन थे और मालकोट किले से उनका क्या संबंध था?

वीर जयमल मेड़तिया मेड़ता के संस्थापक राव दूदा के पोते और महान राजपूत योद्धा थे, जो रिश्ते में संत मीराबाई के चचेरे भाई थे। जब मारवाड़ के राजा मालदेव ने मेड़ता जीतकर मालकोट किले का निर्माण करवाया, तब जयमल ने शेरशाह सूरी की मदद से इस किले पर पुनः अधिकार किया। मुगलों के खिलाफ संघर्ष के दौरान मालकोट किला ही जयमल मेड़तिया की सैन्य और राजनीतिक शक्ति का मुख्य केंद्र था।

चित्तौड़गढ़ का तीसरा साका: जब जयमल मेड़तिया ने अकबर को घुटने टेकने पर मजबूर किया

चित्तौड़गढ़ का तीसरा साका (1567-1568 ई.) राजपूती इतिहास का सबसे भीषण और गौरवशाली युद्ध माना जाता है। मुग़ल सम्राट अकबर ने जब विशाल सेना के साथ चित्तौड़गढ़ किले को घेरा, तब महाराणा उदय सिंह ने किले की रक्षा की कमान वीर जयमल मेड़तिया को सौंपी थी। चार महीनों तक जयमल ने अपनी कुशल रणनीति से अकबर की सेना को किले के भीतर पैर नहीं रखने दिया। जब अकबर की बंदूक की गोली से जयमल के पैर में गंभीर चोट लगी, तब उन्होंने हार नहीं मानी। अगले दिन वे अपने भतीजे वीर कल्ला जी के कंधों पर बैठकर युद्ध मैदान में उतरे। दो वीरों के इस चतुर्भुज रूप ने मुग़ल सेना के छक्के छुड़ा दिए और अंततः लड़ते हुए वीरगति प्राप्त की।

चार हाथों वाले लोकदेवता: कल्ला जी के कंधे पर बैठकर जब जयमल ने उठाई तलवार

चित्तौड़गढ़ के तीसरे साके (1568 ई.) के दौरान एक ऐसा अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला, जिसने मुग़ल सेना के होश उड़ा दिए; जब अकबर की ‘संग्राम’ बंदूक की गोली लगने से वीर जयमल मेड़तिया के पैर में गंभीर चोट आई और वे चलने में असमर्थ हो गए, तब युद्ध मैदान में उतरने की उनकी जिद को पूरा करने के लिए उनके वीर भतीजे कल्ला जी राठौड़ ने उन्हें अपने कंधों पर बैठा लिया। दोनों योद्धाओं ने अपने दोनों हाथों में नंगी तलवारें थाम लीं, जिससे मुग़ल सैनिकों के लिए यह साक्षात चार हाथों वाले लोकदेवता (चतुर्भुज रूप) का अवतार बन गया और कल्ला जी के कंधों पर बैठे जयमल ने बिजली की गति से तलवार चलाते हुए मुग़ल सेना में भयंकर तबाही मचाई, जिसके कारण ही कल्ला जी को आज भी ‘चार हाथों वाले लोकदेवता’ के रूप में पूजा जाता है।

Best Dharamshala in Merta City ( मेड़ता सिटी में सबसे अच्छी धर्म शाला)

मेड़ता सिटी और उसके नजदीकी रेलवे स्टेशन मेड़ता रोड पर श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए कई पवित्र और बजट-अनुकूल धर्मशालाएं उपलब्ध हैं। मुख्य शहर में चारभुजा नाथ मंदिर और बस स्टैंड के पास स्थित हिंदू धर्मशाला सबसे लोकप्रिय और किफायती विकल्प है, जहाँ बुनियादी कमरों और हॉल की सुविधा मात्र ₹150 से ₹300 प्रति दिन के शुरुआती किराए में मिल जाती है। इसके अतिरिक्त, जैन श्रद्धालुओं और आम यात्रियों के लिए मेड़ता रोड जंक्शन के पास स्थित 108 श्री फलवृद्धि पार्श्वनाथ जैन देरासर तीर्थ धर्मशाला एक उत्तम स्थान है; यहाँ अटैच लेट-बाथ वाले साफ-सुथरे नॉन-एसी कमरों का किराया लगभग ₹300 से ₹500 और एसी कमरों का किराया ₹700 से ₹1,000 के बीच रहता है, जहाँ शुद्ध भोजनशाला की व्यवस्था भी है। वहीं, स्थानीय स्तर पर बनी माहेश्वरी भवन और सेरिया समाज धर्मशाला जैसी सामाजिक धर्मशालाएं भी ₹300 से ₹600 के सीमित किराए में सराय और पारिवारिक कमरे प्रदान करती हैं।

Merta Road to Merta City Distance ( मेड़ता रोड से मेड़ता सिटी की दूरी क्या है?)

मेड़ता रोड जंक्शन (MTD) से मुख्य मेड़ता सिटी के बीच की दूरी लगभग 15 किलोमीटर है। रेलवे स्टेशन से मुख्य शहर, चारभुजा नाथ मंदिर या बस स्टैंड पहुँचने के लिए सड़क मार्ग ही एकमात्र विकल्प है क्योंकि रेल बस कभी चलती है कभी नहीं..फिर भी मेड़ता रोड से मेड़ता सिटी आते समय रेलवे स्टेशन पर रेल बस का पता जरूर कर लें।रेलवे स्टेशन के ठीक बाहर से चौबीसों घंटे शेयरिंग ऑटो, निजी टैक्सियाँ और लोकल बसें आसानी से मिल जाती हैं। शेयरिंग ऑटो या बस का किराया मात्र ₹20 से ₹40 प्रति व्यक्ति होता है, जिससे आप महज 20 से 30 मिनट में आराम से मुख्य शहर पहुँच सकते हैं।

मीराबाई स्मारक मेड़ता सिटी (Meera Bai Smarak)

मीराबाई स्मारक (Meera Bai Smarak) मेड़ता सिटी के केंद्र में स्थित एक भव्य ऐतिहासिक स्थल है, जिसे राव दूदा गढ़ भी कहा जाता है। 15वीं शताब्दी में निर्मित इस पावन किले में कृष्ण दीवानी संत मीराबाई का बचपन बीता और उनकी भक्ति की शुरुआत हुई। वर्तमान में राजस्थान सरकार ने इसे एक आधुनिक संग्रहालय (Museum) का रूप दे दिया है, जहाँ खूबसूरत तैलचित्र, सजीव मूर्तियाँ और प्राचीन शिलालेख मीराबाई के संपूर्ण जीवन चरित्र को दर्शाते हैं। चारभुजा मंदिर के पास स्थित इस शांत स्मारक में लगी मीराबाई की विशाल प्रतिमा श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र है।

मीराबाई स्मारक मेड़ता सिटी प्रवेश टिकट और समय

, मेड़ता सिटी में स्थित मीराबाई स्मारक (राव दूदा गढ़) पर्यटकों के लिए नियमित रूप से खुला रहता है। यहाँ का आधिकारिक समय सुबह 9:30 AM से शाम 6:15 PM (सोमवार से शनिवार) तक है, जबकि रविवार को यह शाम 6:30 PM तक खुला रहता है। इस ऐतिहासिक कलात्मक संग्रहालय को देखने के लिए प्रवेश टिकट की कीमत बेहद मामूली मात्र ₹10 प्रति व्यक्ति रखी गई है।यदि आप यात्रा का प्लान बना रहे हैं, तो इसके ठीक सामने स्थित चारभुजा नाथ (मीराबाई) मंदिर के दर्शन भी कर सकते हैं, जो दोपहर 1:00 बजे से 6:30 PM के बीच बंद रहता है।

मेड़ता सिटी का नाम मेड़ता क्यों पड़ा?

मेड़ता का प्राचीन नाम ‘मेदांतक’ था, जिसकी स्थापना आठवीं शताब्दी में प्रतिहार कालीन राजा नागभट्ट द्वितीय ने की थी। बाद में इस क्षेत्र में जैन समुदाय और व्यापारियों की बहुत अधिक बहुलता होने के कारण इसे ‘मेदिनीपुर’ (यानी समृद्ध धरती) कहा जाने लगा। समय के साथ अपभ्रंश होकर यह नाम ‘मेदिनीपुर’ से बदलकर ‘मेड़ता’ हो गया। इसके अलावा, 15वीं शताब्दी में राव जोधा के पुत्र राव दूदा के यहाँ शासन संभालने के बाद, उनके वंशज ‘मेड़तिया राठौड़’ कहलाए, जिससे इस शहर की पहचान ‘मेड़ता सिटी’ के रूप में हमेशा के लिए पक्की हो गई।

मेड़ता सिटी किस जिले में आता है और यह क्यों प्रसिद्ध है?

मेड़ता सिटी राजस्थान के नागौर जिले के अंतर्गत आने वाली एक ऐतिहासिक तहसील और शहर है। यह पूरे भारत में मुख्य रूप से दो बड़ी वजहों से प्रसिद्ध है—पहली, यह भगवान कृष्ण की अनन्य भक्त संत मीराबाई की ऐतिहासिक कर्मस्थली और आध्यात्मिक नगरी है; और दूसरी, यह राजस्थान की सबसे बड़ी और आधुनिक कृषि उपज मंडियों में से एक है। यहाँ का उच्च गुणवत्ता वाला जीरा (Cummin Seeds) और सौंफ पूरे देश और विदेशों में निर्यात किया जाता है, जिसके कारण यह व्यापार का एक बड़ा केंद्र है।

मीराबाई का मेड़ता सिटी से क्या संबंध है?

संत मीराबाई का मेड़ता सिटी से बहुत ही गहरा और अटूट संबंध है, क्योंकि मेड़ता ही उनकी पावन जन्मस्थली और बचपन का घर है। मीराबाई का जन्म मेड़ता के पास कुड़की गाँव में हुआ था, लेकिन उनका लालन-पालन उनके दादा राव दूदा के संरक्षण में मेड़ता के ऐतिहासिक राव दूदा गढ़ (जिसे अब मीराबाई स्मारक कहा जाता है) में हुआ था। यहीं के प्रसिद्ध श्री चारभुजा नाथ मंदिर में मीराबाई ने गिरधर गोपाल (भगवान कृष्ण) की भक्ति का पहला पाठ सीखा था और वे दिन-रात कृष्ण भजनों में लीन रहती थीं।

Merta City to Jodhpur distance मेड़ता सिटी से जोधपुर की दूरी

मेड़ता सिटी से जोधपुर की सड़क मार्ग से कुल दूरी लगभग 124 से 155 किलोमीटर है (यह आपके द्वारा चुने गए रूट पर निर्भर करता है, जैसे NH 458 और NH 25)। यदि आप कार या टैक्सी से यात्रा करते हैं, तो इस सफर को तय करने में करीब 2 घंटे 30 मिनट से 3 घंटे का समय लगता है।

मेड़ता सिटी से जयपुर की दूरी कितनी है और सबसे तेज साधन कौन सा है?

मेड़ता सिटी से राजस्थान की राजधानी जयपुर की सड़क मार्ग से दूरी लगभग 194 किलोमीटर है. NH 458, NH 58 और NH 48 (अजमेर-जयपुर एक्सप्रेसवे) के रास्ते कार या निजी वाहन से जाने पर लगभग 3 घंटे 30 मिनट का समय लगता है. हालांकि, इस रूट पर सबसे आरामदायक और तेज साधन रेल मार्ग है. आपको मुख्य शहर से लोकल टैक्सी या ऑटो द्वारा मेड़ता रोड जंक्शन आना होगा, जहां से जयपुर के लिए नियमित रूप से एक्सप्रेस और इंटरसिटी ट्रेनें चलती हैं, जो आपको 3 घंटे के भीतर जयपुर जंक्शन पहुंचा देती हैं

क्या जोधपुर या जयपुर से मेड़ता सिटी के लिए सीधी बसें उपलब्ध हैं?

हाँ, जोधपुर और जयपुर दोनों ही प्रमुख शहरों से मेड़ता सिटी के लिए राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (RSRTC) की सरकारी और कई निजी ट्रैवल एजेंसियों की बसें नियमित रूप से संचालित होती हैं. जोधपुर के रायकाबाग बस स्टैंड और जयपुर के सिंधी कैंप बस स्टैंड से हर एक-दो घंटे में मेड़ता सिटी के लिए सीधी बस सेवाएं आसानी से मिल जाती हैं. बस द्वारा यात्रा करने पर किराया बेहद किफायती (लगभग ₹150 से ₹250) होता है और यह सीधे मेड़ता सिटी बस स्टैंड पर छोड़ती हैं, जिससे चारभुजा नाथ मंदिर पहुंचना बेहद आसान हो जाता है.

मेड़ता सिटी का इतिहास और 5 सबसे खूबसूरत जगहें पर लिखा यह आर्टिकल आपको कैसा लगा? आप इसे शेयर कर सकते हैं सा। खम्मा घणी सा।

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