भैंसरोड़गढ़ किला :राजस्थान का वो छुपा हुआ ‘वेल्लोर’, जिसे कर्नल टॉड ने सबसे बेस्ट जागीर बताया!

चंबल और बामनी नदी के संगम पर बसा भैंसरोड़गढ़ किला क्यों कहलाता है ‘राजस्थान का स्कॉटलैंड’? जानिए इस अनोखे जल दुर्ग का इतिहास, रहस्य और घूमने की पूरी जानकारी।

भैंसरोड़गढ़ किला : भौगोलिक स्थिति और सामरिक महत्व

भैंसरोड़गढ़ किला अरावली की पहाड़ियों के बीच, चंबल और बामनी (ब्राह्मणी) नदियों के संगम पर करीब 200 फीट ऊँची एक सीधी खड़ी चट्टान पर बना हुआ है।

जल दुर्ग (Water Fort): तीन तरफ से नदियों के गहरे पानी से घिरे होने के कारण यह एक उत्कृष्ट ‘जल दुर्ग’ या ‘औदक दुर्ग’ की श्रेणी में आता है, जिसे प्राचीन काल में दुश्मनों के लिए भेदना असंभव था।

दूरी और मार्ग: यह किला चित्तौड़गढ़ शहर से लगभग 125 किमी, कोटा से 50 किमी और परमाणु नगरी रावतभाटा से मात्र 7 किमी की दूरी पर स्थित है।

राजस्थान का वेल्लोर: अपनी बेहद मजबूत रक्षात्मक प्रणाली और सामरिक महत्व के कारण इसे ‘राजस्थान का वेल्लोर’ भी कहा जाता है।

भैंसरोड़गढ़ किला :गौरवशाली इतिहास और अनूठी मान्यताएं

इस किले का इतिहास सामान्य किलों से बिल्कुल अलग है, क्योंकि इसका निर्माण किसी राजा ने नहीं बल्कि व्यापारियों ने करवाया था।

व्यापारियों द्वारा निर्माण (प्राचीन काल): स्थानीय जनश्रुतियों और इतिहास के अनुसार, इस दुर्ग का मूल निर्माण भैंसा शाह (एक जैन व्यापारी) और रोड़ा चारण (एक बंजारा व्यापारी) ने मिलकर करवाया था। उन्होंने अपने व्यापारिक काफिलों (कारवां) को लुटेरों और डाकुओं से बचाने के लिए इस सुरक्षित स्थान को चुना था। इन्हीं दोनों के नाम पर इस जगह का नाम ‘भैंसरोड़गढ़’ पड़ा। पुरातत्वविदों के अनुसार, यह क्षेत्र ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी से ही बसा हुआ है।

खिलजी का आक्रमण: मध्यकाल में इस किले पर अलाउद्दीन खिलजी ने आक्रमण किया था और इसके प्राचीन मंदिरों तथा इमारतों को भारी नुकसान पहुँचाया था।

मेवाड़ रियासत और चुंडावत कबीला: सन 1741 ईस्वी में, मेवाड़ के महाराजा जगत सिंह द्वितीय ने भैंसरोड़गढ़ को एक जागीर (Fiefdom) के रूप में सलुंबर के राव साहब के पुत्र रावत लाल सिंह द्वितीय को सौंप दिया। तब से यह किला मेवाड़ के प्रथम श्रेणी के 16 उमरावों (प्रमुख सामंतों) का ठिकाना बन गया और यहाँ ‘रावल’ या ‘रावत’ की उपाधि से सम्मानित चुंडावत राजपूतों का शासन रहा।

भैंसरोड़गढ़ किला की वास्तुकला और किले के भीतर के मुख्य आकर्षण

भैंसरोड़गढ़ किला विशुद्ध राजपूत स्थापत्य कला और बेहतरीन इंजीनियरिंग का एक जीवंत उदाहरण है। समय-समय पर शासकों ने इसका जीर्णोद्धार और विस्तार किया।

विशाल परकोटा और प्राचीर: किले की बाहरी दीवारें बेहद चौड़ी और मजबूत हैं, जो सीधे चंबल नदी की गहराई से ऊपर उठती दिखाई देती हैं।

महल और आंतरिक सज्जा: किले के भीतर बने महलों में झरोखे, ऊँचे बुर्ज, छतरियां और नक्काशीदार खंभे हैं। कुछ कमरों की दीवारों पर पारंपरिक राजस्थानी भित्तिचित्र (Frescoes) और कांच का बारीक काम देखने को मिलता है।

धार्मिक और जल स्थल: किले के परिसर में पाँच प्राचीन पानी के टैंक (जलाशय) बने हुए हैं। इसके अलावा यहाँ भगवान शिव, गणेश और देवी भीम चौरी को समर्पित ऐतिहासिक मंदिर मौजूद हैं।

लिविंग फोर्ट (Living Fort): इस किले की एक बड़ी विशेषता यह है कि इसके विशाल परकोटे के भीतर आज भी लगभग 5,000 लोग निवास करते हैं, जिससे यहाँ का प्राचीन ग्रामीण परिवेश जीवंत बना हुआ है।

भैंसरोड़गढ़ किला आधुनिक स्वरूप: एक लक्जरी हेरिटेज होटल

आज भैंसरोड़गढ़ किला एक निजी संपत्ति है, जिसके मालिक पूर्व शाही परिवार के वंशज (रावत शिव चरण सिंह जी के परिवार) हैं।

हेरिटेज होटल: सन 2007 में इस महल के एक बड़े हिस्से को एक बेहद आलीशान बुटीक हेरिटेज होटल में बदल दिया गया। दुनिया भर से आने वाले पर्यटक यहाँ राजपूती ठाट-बाट का अनुभव करने आते हैं।

शाही मेहमाननवाज़ी: होटल के कमरों (सूट्स) से चंबल नदी और आसपास के घने जंगलों का अद्भुत नज़ारा दिखता है। यहाँ आज भी चांदी की घंटियों से खाना परोसने जैसी पुरानी शाही परंपराओं का पालन किया जाता है।

भैंसरोड़गढ़ वन्यजीव अभयारण्य (Wildlife Sanctuary)

किले के ठीक पास ही भैंसरोड़गढ़ वन्यजीव अभयारण्य स्थित है। यह अभयारण्य घने जंगलों, विंध्य पहाड़ियों और चंबल के मगरमच्छों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ पर्यटक सफारी का आनंद ले सकते हैं और तेंदुए, सियार, चिंकारा, चौसिंगा तथा कई प्रवासी पक्षियों को देख सकते हैं।

भैंसरोड़गढ़ किला किस प्रकार का दुर्ग है?

भैंसरोड़गढ़ किला मुख्य रूप से एक जल दुर्ग है, जिसे प्राचीन भारतीय सैन्य विज्ञान (जैसे कौटिल्य के अर्थशास्त्र) में ‘औदक दुर्ग’ भी कहा जाता है।

इसके साथ ही यह एक ऊँची और सीधी खड़ी चट्टान पर स्थित होने के कारण गिरि दुर्ग (पहाड़ी किला) की श्रेणी में भी आता है। इसके चारों ओर घने जंगल होने से इसमें वन दुर्ग की विशेषताएं भी मिलती हैं।

भैंसरोड़गढ़ किला किन नदियों के संगम पर स्थित है?

यह विशाल किला चंबल नदी और बामनी (ब्राह्मणी) नदी के पवित्र और खूबसूरत संगम पर स्थित है।किला लगभग 200 फीट ऊँची एक प्राकृतिक पहाड़ी (चट्टान) पर बना है, जिसके तीन तरफ इन दोनों नदियों का गहरा पानी एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच (खाई) का काम करता है। इसी वजह से प्राचीन काल में दुश्मनों के लिए इस पर सीधा हमला करना लगभग असंभव था।

राजस्थान का वेल्लोर’ किसे कहा जाता है?

भैंसरोड़गढ़ दुर्ग को ही ‘राजस्थान का वेल्लोर’ कहा जाता है।

तुलना का कारण: तमिलनाडु के वेल्लोर में स्थित ‘वेल्लोर फोर्ट’ अपनी अभेद्य जल खाई, मजबूत परकोटे और सामरिक सुरक्षा प्रणाली के लिए पूरे भारत में प्रसिद्ध है। भैंसरोड़गढ़ किले की भौगोलिक बनावट, नदियों से घिरी उसकी सुरक्षा और मजबूत स्थापत्य कला बिल्कुल वैसी ही है, इसी भौगोलिक और सामरिक समानता के कारण इसे यह उपनाम दिया गया है।

कर्नल जेम्स टॉड ने भैंसरोड़गढ़ किले के बारे में क्या कहा था?

राजस्थान के इतिहास के जनक कहे जाने वाले ब्रिटिश इतिहासकार कर्नल जेम्स टॉड इस किले की अद्भुत सुंदरता, नदियों के विहंगम दृश्य और इसकी सामरिक स्थिति से बेहद प्रभावित थे। उन्होंने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक में इस किले की तारीफ करते हुए कहा था:

“यदि मुझे राजस्थान (राजपूताना) में कोई एक जागीर (रियासत/संपत्ति) चुनने का विकल्प दिया जाए, तो मैं बिना एक पल झिझके भैंसरोड़गढ़ को चुनूँगा।”

चित्तौड़गढ़ से भैंसरोड़गढ़ किले की दूरी कितनी है?

चित्तौड़गढ़ से भैंसरोड़गढ़ किले की सड़क मार्ग से दूरी लगभग 120 से 125 किलोमीटर है।

रूट और समय: चित्तौड़गढ़ से निजी कार, टैक्सी या बस द्वारा यहाँ पहुँचने में लगभग 2.5 से 3 घंटे का समय लगता है।

रास्ता: चित्तौड़गढ़ से निकलते ही यात्रा राष्ट्रीय राजमार्ग (NH 27) और फिर राज्य राजमार्ग (SH 9) से होते हुए रावतभाटा के रास्ते भैंसरोड़गढ़ तक पहुँचती है। यह रास्ता काफी घुमावदार और पहाड़ियों से घिरा है, जो यात्रा को बेहद खूबसूरत बनाता है।

कोटा से भैंसरोड़गढ़ किला कैसे जाएँ

कोटा से भैंसरोड़गढ़ किले की दूरी मात्र 50 से 55 किलोमीटर है और यहाँ जाने के लिए सड़क मार्ग (Roadway) सबसे बेस्ट और आसान विकल्प है

निजी वाहन/टैक्सी: कोटा से आप अपनी कार या टैक्सी किराए पर लेकर सीधे जा सकते हैं। कोटा-रावतभाटा रोड के जरिए यहाँ पहुँचने में मात्र 1 से 1.5 घंटे का समय लगता है।

बस सेवा: कोटा बस स्टैंड से रावतभाटा के लिए हर आधे-एक घंटे में राजस्थान लोक परिवहन और प्राइवेट बसें चलती हैं। आप रावतभाटा पहुँचकर वहाँ से स्थानीय ऑटो या टैक्सी लेकर किले तक जा सकते हैं।

रास्ता (Route): कोटा → जवाहर सागर डैम रोड → रावतभाटा → भैंसरोड़गढ़। यह पूरा रास्ता मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के बफर जोन और घने जंगलों से होकर गुजरता है, इसलिए सड़क मार्ग से सफर करना बेहद रोमांचक होता है।

भैंसरोड़गढ़ फोर्ट का नजदीकी शहर कौन सा है?

भैंसरोड़गढ़ फोर्ट का सबसे नजदीकी शहर ‘रावतभाटा’ (Rawatbhata) है, जो यहाँ से मात्र 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

रावतभाटा का महत्व: रावतभाटा को भारत की “परमाणु नगरी” (Atomic City) भी कहा जाता है, क्योंकि यहाँ ‘राजस्थान परमाणु ऊर्जा स्टेशन’ (RAPS) स्थित है।

सुविधाएँ: यदि कोई पर्यटक भैंसरोड़गढ़ के महंगे हेरिटेज होटल में नहीं रुकना चाहता, तो वह रावतभाटा शहर में बजट होटल्स, मार्केट, एटीएम और रेस्टोरेंट जैसी सभी जरूरी सुविधाएं आसानी से पा सकता है।

Bhainsrorgarh Fort Hotel Room Price / Tariff? (कमरों का किराया कितना है?)

भैंसरोड़गढ़ किला एक बेहद एक्सक्लूसिव बुटीक हेरिटेज प्रॉपर्टी है, जिसमें केवल 9 शाही कमरे (5 सूट्स और 4 डीलक्स रूम) हैं.

शुरुआती किराया: यहाँ एक रात रुकने का सामान्य किराया ₹7,500 से ₹15,000 प्रति रात के बीच शुरू होता है. ऑफ-सीजन (गर्मी) और पीक-सीजन (सर्दियों/त्योहारों) के अनुसार कीमतों में बदलाव होता रहता है.

प्रीमियम सूट्स: इसके सबसे बड़े और आलीशान रूम जैसे मेवाड़ सूट (Mewar Suite) या भैंसरोड़गढ़ सूट (Bhainsrorgarh Suite) का किराया अधिक होता है, जहाँ से चंबल नदी और बागों का सीधा विहंगम दृश्य दिखाई देता है.

सुविधाएँ: इस किराए में आमतौर पर शाही माहौल में पारंपरिक राजस्थानी भोजन (AP या MAP प्लान) और चंबल नदी में बोट सफारी जैसी गतिविधियां शामिल होती हैं.

क्या भैंसरोड़गढ़ किले में बिना बुकिंग के एंट्री मिलती है?

जी नहीं, आम पर्यटकों के लिए बिना किसी पूर्व बुकिंग के किले के मुख्य परिसर (होटल एरिया) में एंट्री पूरी तरह प्रतिबंधित है।

कारण: चूंकि यह अब एक पूरी तरह से प्राइवेट लग्जरी हेरिटेज होटल है, इसलिए यहाँ रुकने वाले मेहमानों की प्राइवेसी और सुरक्षा के लिए बाहरी लोगों का आना-जाना वर्जित रहता है.

अंदर जाने का तरीका: यदि आप वहाँ ठहर नहीं रहे हैं, लेकिन फिर भी अंदर से किला देखना चाहते हैं, तो आपको होटल के रेस्टोरेंट में लंच या डिनर के लिए एडवांस रिज़र्वेशन (Table Booking) कराना होगा. कुछ विशेष सीजन में गैर-निवासियों के लिए लगभग ₹300 का एंट्री पास भी जारी किया जाता है, लेकिन इसकी अनुमति होटल प्रबंधन के विवेक पर निर्भर करती है.

भैंसरोड़गढ़ फोर्ट के ओनर (मालिक) कौन हैं?

भैंसरोड़गढ़ किले के वर्तमान मालिक मेवाड़ के प्रसिद्ध चुंडावत राजपूत कबीले के वंशज रावत शिव चरण सिंह जी का परिवार है.

इतिहास: सन 1741 में मेवाड़ के महाराजा ने यह जागीर रावत लाल सिंह द्वितीय को भेंट की थी.

जीर्णोद्धार: रावत शिव चरण सिंह जी के बेटों (कुंवर हेमंत सिंह और कुंवर मदन सिंह) ने ही साल 2006-2007 में इस ऐतिहासिक महल की मरम्मत करवाकर इसे दुनिया के बेहतरीन बुटीक हेरिटेज रिसॉर्ट्स की सूची में शामिल करवाया. आज भी शाही परिवार का यह हिस्सा इसी परिसर में रहता है।

बाडोली शिव मंदिर (Baroli Temples) – 9वीं शताब्दी की अनूठी विरासत

इतिहास और वास्तुकला: इस परिसर में कुल 9 प्राचीन मंदिर हैं, जिनका निर्माण 9वीं से 10वीं शताब्दी के दौरान गुर्जर-प्रतिहार राजवंश के शासकों ने करवाया था। यहाँ की पत्थर की नक्काशी इतनी बारीक और जीवंत है कि इसकी तुलना उड़ीसा के कोणार्क और भुवनेश्वर के मंदिरों से की जाती है।

मुख्य आकर्षण: यहाँ का मुख्य मंदिर घटेश्वर महादेव मंदिर है, जिसका गर्भगृह, बारीक नक्काशीदार खंभे और कमल के आकार की छत वास्तुकला प्रेमियों को हैरान कर देती है। इसके अलावा परिसर में शेषशायी विष्णु, महिषासुर मर्दिनी, गणेश और त्रिमूर्ति शिव के अद्भुत मंदिर भी हैं।

स्थान और दूरी: यह भैंसरोड़गढ़ किले से लगभग 4 से 5 किमी और रावतभाटा शहर से 3 किमी पहले स्थित है।

टिकट और समय: Group of Barolia Temples सुबह 6:00 बजे से रात 8:00 बजे तक खुला रहता है और यहाँ पर्यटकों के लिए एंट्री पूरी तरह से फ्री है। यहाँ शांति और फोटोग्राफी के लिए सुबह का समय सबसे बेस्ट है।

चंबल नदी बोट सफारी और मगरमच्छ (Chambal Boat Safari)

चंबल नदी को भारत की सबसे साफ और प्रदूषण मुक्त नदियों में गिना जाता है और भैंसरोड़गढ़ के पास इसका बैकवाटर एक अलग ही रोमांच पैदा करता है।

रोमांचक सफारी: भैंसरोड़गढ़ किले के ठीक नीचे चंबल नदी में गाइडेड बोट सफारी का आयोजन होता है। जब नाव शांत गहरे पानी से होकर गुजरती है, तो दोनों तरफ ऊँची चट्टानें और घने जंगल दिखाई देते हैं जो अमेज़न की नदियों जैसा अहसास कराते हैं।

मगरमच्छ और घड़ियाल: चंबल नदी अपने विशालकाय मगरमच्छों (Mugger Crocodiles) और दुनिया के सबसे दुर्लभ घड़ियालों (Gharials) के प्राकृतिक आवास के लिए विश्व प्रसिद्ध है। बोट सफारी के दौरान आप इन्हें नदी के किनारों पर या चट्टानों पर धूप सेकते हुए बहुत करीब से (सुरक्षित दूरी पर) देख सकते हैं।

पक्षियों का स्वर्ग (Bird Watching): यह जगह प्रवासी और स्थानीय पक्षियों के लिए जन्नत है। सफारी के दौरान आपको इंडियन स्कीमर, पेलीकन, बगुले (Herons), किंगफिशर और कई तरह के ईगल्स आसानी से शिकार करते हुए दिख जाएंगे।

सफारी बुकिंग: यदि आप भैंसरोड़गढ़ हेरिटेज फोर्ट होटल में रुकते हैं, तो वे खुद मेहमानों के लिए निजी बोट सफारी का इंतजाम करते हैं। इसके अलावा कोटा और जवाहर सागर डैम के पास मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व (MHTR) के तहत सरकारी और प्राइवेट Chambal Boat Safari MHTR ऑपरेटर्स भी मौजूद हैं।

भैंसरोड़गढ़ दुर्ग का निर्माता कौन है?

इस दुर्ग का निर्माण किसी राजा या महाराजा ने नहीं, बल्कि भैंसा शाह (एक जैन व्यापारी) और रोड़ा चारण (एक बंजारा व्यापारी) ने मिलकर करवाया था।

इतिहास और कारण: प्राचीन काल में मालवा और मेवाड़ के बीच व्यापारिक मार्ग यहीं से गुजरता था। लुटेरों और डाकुओं से अपने कीमती व्यापारिक काफिले (कारवां) तथा माल की सुरक्षा के लिए इन दोनों व्यापारियों ने इस अभेद्य स्थान को चुना।

नामकरण: ‘भैंसा शाह’ के नाम से ‘भैंस’ और ‘रोड़ा चारण’ के नाम से ‘रोड़’ शब्द को मिलाकर इस किले और जगह का नाम ‘भैंसरोड़गढ़’ पड़ा। यह भारत के चुनिंदा किलों में से एक है जिसका निर्माण व्यापारियों द्वारा कराया गया।

भैंसरोड़गढ़ किला चित्तौड़गढ़ पर लिखा यह आर्टिकल आपको अच्छा लगा है तो इसे शेयर करें सा। आपरो घणो मान और आभार सा।

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