राजस्थान का इतिहास केवल युद्धों और जौहर की कहानियों से नहीं, बल्कि स्वाभिमान (Self-respect) की मिसालों से भी भरा है। इन्हीं में से एक सबसे चर्चित नाम है ‘रूठी रानी’ यानी जैसलमेर की राजकुमारी उमादे।
क्यों रूठ गई थी रानी उमादे? (The Reason Behind Her Anger)
जैसलमेर के राव लूणकरण की पुत्री उमादे का विवाह 1536 ईस्वी में मारवाड़ (Jodhpur) के प्रतापी शासक राव मालदेव (Rao Maldev) के साथ हुआ था। लेकिन विवाह की पहली ही रात कुछ ऐसा हुआ कि वह आजीवन अपने पति से रूठी रहीं:
मान-मर्यादा को ठेस: लोक मान्यताओं के अनुसार, विवाह की रात राव मालदेव अत्यधिक मदिरापान के कारण रानी के पास पहुँचने में देरी कर रहे थे। रानी ने अपनी दासी ‘भारमली’ को राजा को बुलाने भेजा।
मालदेव की भूल: नशे की हालत में राव मालदेव ने दासी भारमली को ही रानी समझ लिया। जब उमादे वहाँ पहुँची और उन्होंने यह दृश्य देखा, तो उनके स्वाभिमान को गहरी चोट लगी।
आजीवन अलगाव: उसी पल उमादे ने निर्णय लिया कि वे अब कभी राव मालदेव को पति के रूप में स्वीकार नहीं करेंगी। वे मारवाड़ तो आईं, लेकिन महल में राजा से अलग रहीं।
तारागढ़ किला और रूठी रानी (Roothi Rani and Taragarh Fort)
राव मालदेव ने रानी को मनाने की बहुत कोशिश की, लेकिन उमादे का संकल्प अडिग था।अजमेर का प्रवास (Stay at Ajmer): वे जोधपुर छोड़कर अजमेर के तारागढ़ किले (Taragarh Fort) में रहने चली गईं। आज भी इस किले के एक हिस्से को ‘रूठी रानी का महल’ कहा जाता है।ईसरदास जी की भूमिका: राजा ने प्रसिद्ध कवि ईसरदास जी को रानी को मनाने भेजा। रानी मान भी गई थीं, लेकिन अन्य रानियों के ईर्ष्यावश किए गए षड्यंत्र (कवि आशा बारहट के दोहे) के कारण वे रास्ते से ही वापस लौट गईं।
हमारी टीम का अनुभव और स्थानीय चर्चा (Team Experience & Local Insights)
हमारी टीम ने तारागढ़ (Ajmer) के स्थानीय गाइड (Local Guide) से बात की, तो उन्होंने एक बहुत ही मर्मस्पर्शी बात बताई। भले ही उमादे जीवन भर राव मालदेव से रूठी रहीं, लेकिन जब मालदेव की मृत्यु हुई, तो रानी ने अपने पति के प्रति कर्तव्य निभाते हुए उनकी पगड़ी के साथ सती होने का निर्णय लिया। यह उनके चरित्र की महानता और प्रेम के एक अलग स्वरूप को दर्शाता है।अजमेर के पास लोकल ढाबों (Local Dhabas) पर बुजुर्ग आज भी दोहों के जरिए उमादे के स्वाभिमान की गाथा सुनाते हैं।कैसा लगा हमारा यह आर्टिकल आपकी सार्थक राय दें ताकि हम और सुधार कर सकें।


