“बिना सीमेंट-कंक्रीट, सिर्फ रंगों का खेल! मथेरन कला (Matheran Art) की वो 5 बातें जो हर राजस्थानी को जाननी चाहिए”

मथेरन कला बीकानेर (Matheran Art Bikaner), मथेरन कला का इतिहास (History of Matheran Art), बीकानेर की मथेरन कला का वर्तमान (Matheran Art of Bikaner), मथेरन कला की विशेषताएं (Features of Matheran Art) और उस्ता कला से अंतर पर इस आर्टिकल में सब पढ़ने को मिलेगा

मथेरन कला का गौरवशाली इतिहास (History of Matheran Art)

मथेरन कला बीकानेर (Matheran Art Bikaner) की एक पारंपरिक लोक कला है, जिसे मुख्य रूप से मथेरन समुदाय (Matheran Community) द्वारा विकसित किया गया। यह समुदाय जैन धर्म से संबंधित है और सदियों से मंदिरों और महलों की दीवारों को सजाने का काम करता आ रहा है।स्थानीय गाइड (Local Guide Bikaner) के अनुसार, जब बीकानेर की स्थापना हुई, तब यहाँ के शासकों ने जैन चित्रकला (Jain Painting Bikaner) को संरक्षण दिया। मथेरन कलाकार (Matheran Artists) अपनी कूची से देवी-देवताओं के चित्र (Portraits of Deities) और पौराणिक कथाओं को दीवारों पर उकेरने में माहिर थे।

मथेरन कला की अनूठी विशेषताएं (Features of Matheran Art)

इस कला की सबसे बड़ी विशेषता इसकी तकनीक और उपयोग किए जाने वाले प्राकृतिक रंग (Natural Colors) हैं। बीकानेर स्कूल ऑफ आर्ट (Bikaner School of Art) के अंतर्गत आने वाली इस शैली की दो मुख्य पद्धतियाँ हैं:

  • आला-गीला पद्धति (Wet Fresco Method): इसमें चूने के ताजे और गीले प्लास्टर पर चित्रकारी की जाती है, जिससे रंग दीवार के अंदर तक समा जाते हैं। इसे ‘भीती चित्र’ (Fresco Painting) भी कहा जाता है।
  • सूखी पद्धति (Dry Method): यह सूखी दीवारों पर की जाने वाली पारंपरिक राजस्थानी पेंटिंग (Traditional Rajasthani Painting) है।

मथेरन कला में बारीक रेखांकन (Fine Lining) और फूलों की बेल-बूटे वाली नक्काशी इसे अन्य कलाओं से अलग बनाती है।

उस्ता कला और मथेरन कला में अंतर (Difference between Usta and Matheran Art)

उस्ता कला और मथेरन कला दोनों ही बीकानेर की अनमोल विरासत हैं, लेकिन इनमें गहरा अंतर है। जहाँ उस्ता कला (Usta Art) मुख्य रूप से ऊंट की खाल या लकड़ी पर की जाने वाली स्वर्ण नक्काशी (Gold Embossing) है, वहीं मथेरन कला (Matheran Art) दीवारों पर की जाने वाली पारंपरिक भित्ति चित्रकला (Fresco Painting) है।उस्ता कला में उस्ता समुदाय (Muslim Community) द्वारा ‘मुनव्वत’ तकनीक का उपयोग कर सोने की बारीक परतें चढ़ाई जाती हैं, जबकि मथेरन कला में मथेरन समुदाय (Jain Community) द्वारा धार्मिक और पौराणिक विषयों पर आला-गीला पद्धति (Wet Fresco) से काम किया जाता है। संक्षेप में, उस्ता कला अपनी शाही चमक और सोने के काम के लिए प्रसिद्ध है, तो मथेरन कला अपनी धार्मिक सादगी और दीवारों पर की गई सूक्ष्म चित्रकारी (Fine Miniature Work) के लिए जानी जाती है।

मथेरन कला की वर्तमान स्थिति (Current Status of Matheran Art

आज के डिजिटल युग में, यह हस्तनिर्मित कलाकृतियां (Handmade Artworks) धीरे-धीरे लुप्त हो रही हैं। मथेरन कला की वर्तमान स्थिति (Current Status) को देखते हुए अब कई संस्थाएं मथेरन कला वर्कशॉप (Matheran Art Workshop) आयोजित कर रही हैं ताकि युवा पीढ़ी अपनी राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत (Cultural Heritage of Rajasthan) को बचा सके।

बीकानेर में मथेरन कला के दर्शन कहाँ किए जा सकते हैं? (Where to see Matheran Art in Bikaner?)

यदि आप बीकानेर पर्यटन (Bikaner Tourism) पर हैं, तो आपको पुराने बीकानेर के घरों (Heritage Houses) और हवेलियों में यह कला देखने को मिलेगी। विशेष रूप से बीकानेर के प्रसिद्ध भांडाशाह जैन मंदिर (Bhandasar Jain Temple) की दीवारों पर मथेरन कलाकारों का अद्भुत काम देखा जा सकता है। यहाँ की भित्ति चित्रकला (Fresco Painting) को देखकर हमारी टीम को प्राचीन राजस्थान की भव्यता का अहसास हुआ। इसके अलावा, जूनागढ़ किले (Junagarh Fort) के कुछ हिस्सों में भी मथेरन शैली की झलक मिलती है।

बीकानेर में जैन चित्रकला का क्या महत्व है? (What is the Significance of Jain Painting in Bikaner?)

जैन चित्रकला बीकानेर (Jain Painting Bikaner) का हृदय है। बीकानेर के शासकों ने जैन समुदाय और उनके कलाकारों को हमेशा संरक्षण (Patronage) दिया। इस शैली की सबसे बड़ी विशेषता जैन हस्तलिखित ग्रंथ (Jain Manuscripts) और कल्पसूत्र (Kalpa Sutra) के चित्रण हैं। इन पेंटिंग्स में सोने की स्याही (Gold Ink) और कीमती पत्थरों के रंगों का प्रयोग किया जाता था। हमारी टीम ने भांडाशाह जैन मंदिर (Bhandasar Jain Temple) में देखा कि कैसे जैन तीर्थंकरों के जीवन और उनके उपदेशों को दीवारों पर बहुत ही सूक्ष्मता (Precision) से उकेरा गया है। यह चित्रकला केवल धार्मिक नहीं है, बल्कि यह राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत (Cultural Heritage of Rajasthan) का एक अनिवार्य हिस्सा है, जो अहिंसा और आध्यात्मिकता को रंगों के माध्यम से दर्शाती है।

पुरानी पेंटिंग्स में ‘आला-गीला’ और ‘भीती चित्र’ तकनीक क्या है? (What is Ala-Gila and Wall Painting Technique in Old Paintings?)

बीकानेर की पुरानी पेंटिंग (Old Paintings) में उपयोग होने वाली सबसे प्रसिद्ध तकनीक आला-गीला (Wet Fresco Method) है। इसे ‘पणा’ या ‘फ्रेस्को बुओनो’ (Fresco Buono) भी कहा जाता है। इसमें चूने के प्लास्टर के गीले होने पर ही रंगों को दीवार में समाहित कर दिया जाता है। भीती चित्रकारी तकनीक (Technique of Wall Painting) की दूसरी विधि ‘टेम्पेरा’ है, जो सूखी दीवार पर की जाती है। स्थानीय कलाकारों (Matheran Artists) के साथ बैठकर हमने जाना कि आला-गीला पद्धति से बने चित्र सैंकड़ों सालों तक सुरक्षित रहते हैं क्योंकि रंग दीवार की सतह का हिस्सा बन जाते हैं। बीकानेर के मंदिर और मथेरन कला (Bikaner Temples and Matheran Art) इसी तकनीक के कारण आज भी विश्व प्रसिद्ध हैं।

क्या आज भी बीकानेर में ये पुरानी पेंटिंग्स और जैन कला जीवित हैं? (Is the Old Painting and Jain Art Still Alive in Bikaner Today?)

हाँ, लेकिन इसकी वर्तमान स्थिति (Current Status) मिश्रित है। हालाँकि पुराने बीकानेर की गलियों का सफर (Travel through Bikaner Lanes) करते समय आपको कई हवेलियों में ये कलाकृतियाँ धूल फांकती मिलेंगी, लेकिन अब नई पीढ़ी के कलाकार इन्हें बचाने का प्रयास कर रहे हैं। मथेरन कला वर्कशॉप (Matheran Art Workshop) और हस्तनिर्मित कलाकृतियां (Handmade Artworks) बनाकर इन शैलियों को पुनर्जीवित किया जा रहा है। हमारी टीम ने स्थानीय ढाबों (Local Dhabas) पर कलाकारों से बात की, जहाँ उन्होंने बताया कि अब वे आधुनिक घरों के इंटीरियर के लिए भी इन पुरानी पेंटिंग्स (Traditional Paintings) का उपयोग कर रहे हैं। विदेशी पर्यटकों के बीच इन बारीकियों की मांग बहुत अधिक है।

बीकानेर की पुरानी पेंटिंग की मुख्य शैलियाँ कौन सी हैं? (What are the Main Styles of Old Paintings in Bikaner?)

बीकानेर की पुरानी पेंटिंग (Old Paintings of Bikaner) मुख्य रूप से दो प्रमुख शैलियों का संगम है—मथेरन कला (Matheran Art) और उस्ता कला (Usta Art)। हमारी टीम के अनुभव (Team Experience) के अनुसार, जहाँ उस्ता कला अपनी स्वर्ण नक्काशी (Gold Embossing) के लिए जानी जाती है, वहीं मथेरन शैली की पुरानी पेंटिंग्स मुख्य रूप से भित्ति चित्रों (Fresco Paintings) और कागज़ के चित्रों (Paper Paintings) के रूप में मिलती हैं। इन पेंटिंग्स में मुगल और राजस्थानी शैलियों का अद्भुत मिश्रण (Fusion of Mughal and Rajasthani Styles) देखने को मिलता है। बीकानेर स्कूल ऑफ आर्ट (Bikaner School of Art) के तहत बनने वाली इन पेंटिंग्स में प्राकृतिक रंगों (Natural Colors) का उपयोग किया जाता था, जो सदियों बाद भी फीके नहीं पड़े हैं। पुराने बीकानेर के घर (Heritage Houses of Bikaner) और किले इन पुरानी पेंटिंग्स के संग्रहालय की तरह हैं।

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