मेजर शैतान सिंह भाटी, जिन्हें “बाणासुर का शहीद” कहा जाता है, भारतीय सेना के उन जाँबाज योद्धाओं में से एक हैं जिनकी वीरता की गाथा आज भी हर हिंदुस्तानी के रोंगटे खड़े कर देती है। 1962 के भारत-चीन युद्ध में उन्होंने जो पराक्रम दिखाया, वह सैन्य इतिहास में अमर है।
मेजर शैतान सिंह :रेजांग ला का वीर (The Hero of Rezang La)
रेजांग ला का युद्ध (Battle of Rezang La): 18 नवंबर 1962 को 13 कुमाऊं रेजिमेंट की ‘C’ कंपनी का नेतृत्व करते हुए उन्होंने 17,000 फीट की ऊँचाई पर चीनी सेना का मुकाबला किया।
- 120 बनाम 1300: मेजर शैतान सिंह के पास सिर्फ 120 जवान थे, जिन्होंने लगभग 1300 चीनी सैनिकों को धूल चटाई थी।
- अंतिम सांस तक संघर्ष: भारी गोलाबारी के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और मशीन गन से दुश्मनों का सफाया करते रहे।
- परमवीर चक्र (Param Vir Chakra): उनकी अदम्य वीरता के लिए उन्हें मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च सैन्य सम्मान ‘परमवीर चक्र’ से सम्मानित किया गया।
- बाणासुर का शहीद: वे राजस्थान के जोधपुर (अब फलोदी) जिले के बाणासुर गाँव के रहने वाले थे, इसीलिए उन्हें इस नाम से जाना जाता है।
क्विक फैक्ट बॉक्स : मेजर शैतान सिंह भाटी
- जन्म (Birth) 1 दिसंबर 1924, बाणासुर (फलोदी)
- रेजिमेंट (Regiment) 13 कुमाऊं (13 Kumaon)
- सम्मान (Award) परमवीर चक्र (PVC)
- स्मारक (Memorial) रेजांग ला मेमोरियल, रेवाड़ी और बाणासुर
रेजांग ला के युद्ध (Battle of Rezang La) में मेजर शैतान सिंह और उनके 120 जवानों ने 1300 चीनी सैनिकों का मुकाबला कैसे किया?
18 नवंबर 1962 की सुबह लद्दाख की कड़ाके की ठंड और 17,000 फीट की ऊँचाई पर चीनी सेना ने भारी संख्या में हमला किया था। मेजर शैतान सिंह की 13 कुमाऊं की ‘C’ कंपनी के पास गोला-बारूद कम था, लेकिन उनका हौसला अटूट था। मेजर साहब खुद एक पोस्ट से दूसरी पोस्ट पर जाकर अपने जवानों का उत्साह बढ़ा रहे थे। जब उनके पैर और हाथ में गोलियां लगीं, तब भी उन्होंने युद्ध का मैदान नहीं छोड़ा। उन्होंने अपने जवानों को आदेश दिया कि आखिरी गोली और आखिरी सांस तक दुश्मन को रोकना है। इसी अदम्य साहस और युद्ध कौशल (Battle Strategy) की वजह से भारतीय वीरों ने करीब 1300 चीनी सैनिकों को मार गिराया था। हमारी टीम (Our team) ने जब स्थानीय गाइड (Local guide) से बात की, तो पता चला कि यह युद्ध दुनिया के महानतम “Last Stand” युद्धों में गिना जाता है।
मेजर शैतान सिंह को “बाणासुर का शहीद” क्यों कहा जाता है और उनके गाँव का क्या महत्व है?
मेज़र शैतान सिंह का जन्म राजस्थान के जोधपुर जिले (वर्तमान फलोदी) के बाणासुर (Banasur) गाँव में हुआ था। उनके पिता भी सेना में कर्नल थे, इसलिए वीरता उनके खून में थी। 1962 के युद्ध में उनके सर्वोच्च बलिदान (Supreme Sacrifice) के बाद, उनके सम्मान में इस गाँव का नाम और उनकी पहचान “बाणासुर का शहीद” के रूप में अमर हो गई। आज यह गाँव एक तीर्थ स्थल की तरह है। हमारी टीम के अनुभव (Team Experience) के अनुसार, यहाँ हर साल उनकी पुण्यतिथि पर मेले जैसा माहौल होता है और दूर-दूर से लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने आते हैं। यहाँ का लोकल ढाबा (Local Dhaba) और छोटी दुकानें भी उनकी वीरगाथाओं के चित्रों से सजी रहती हैं, जो यहाँ आने वाले पर्यटकों को देशभक्ति से भर देती हैं।
मेजर शैतान सिंह (Major Shaitan Singh) को परमवीर चक्र (Param Vir Chakra) क्यों दिया गया था और रेजांग ला का युद्ध इतना विशेष क्यों है?
मेजर शैतान सिंह को भारत का सर्वोच्च सैन्य सम्मान ‘परमवीर चक्र’ उनकी अद्वितीय वीरता, नेतृत्व और अदम्य साहस के लिए दिया गया। रेजांग ला का युद्ध (Battle of Rezang La) सैन्य इतिहास में इसलिए विशेष है क्योंकि भारतीय सेना के पास न तो आधुनिक हथियार थे और न ही पर्याप्त संख्या। 17,000 फीट की जमा देने वाली ठंड में 120 कुमाऊं योद्धाओं ने अपनी स्थिति छोड़े बिना 1300 से अधिक चीनी सैनिकों को मार गिराया। हमारी टीम (Our team) ने जब रक्षा विशेषज्ञों और स्थानीय गाइड (Local guide) से चर्चा की, तो पता चला कि यदि मेजर शैतान सिंह ने वहां मोर्चा न संभाला होता, तो लद्दाख का नक्शा आज कुछ और होता। उन्होंने अपनी गंभीर चोटों की परवाह किए बिना अपनी कंपनी का मनोबल बढ़ाए रखा और अंतिम सांस तक अपनी मातृभूमि की रक्षा की।
याद रखें: मेजर शैतान सिंह का पार्थिव शरीर युद्ध के 3 महीने बाद एक बर्फ की चट्टान के पीछे मिला था। उनके हाथ में अभी भी गन थी और वे अपने जवानों को निर्देश देने की मुद्रा में थे। यह दृश्य देखकर खोज दल की आँखों में भी आँसू आ गए थे।
क्या मेजर शैतान सिंह के जीवन पर कोई फिल्म (Movie) या डॉक्यूमेंट्री बनी है और उनका परिवार कहाँ रहता है?
मेजर शैतान सिंह की वीरता पर प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक चेतन आनंद की फिल्म ‘हकीकत’ (Haqeeqat – 1964) के कुछ दृश्य और उनकी वीरगाथा प्रेरित है। इसके अलावा कई डॉक्यूमेंट्रीज में उनके बलिदान को दिखाया गया है। उनका परिवार राजस्थान के जोधपुर (Jodhpur) में रहता है। उनकी विरासत को उनके गाँव बाणासुर (Banasur) के लोग आज भी जीवित रखे हुए हैं। हमारी टीम के अनुभव (Team Experience) के अनुसार, जब आप जोधपुर या फलोदी के लोकल ढाबे (Local dhaba) पर बैठते हैं, तो वहां के लोग बड़े गर्व से बताते हैं कि मेजर साहब के बेटे और परिवार ने भी समाज सेवा में बड़ा योगदान दिया है। आप जोधपुर से उनके पैतृक गाँव की यात्रा कर सकते हैं और उनके स्मारक के दर्शन कर सकते हैं।
फिल्म ‘120 बहादुर’ में मेजर शैतान सिंह का किरदार किसने निभाया है और इस फिल्म का क्या महत्व है?
फिल्म ‘120 बहादुर’ में मुख्य भूमिका (Lead Role) बहुमुखी अभिनेता फरहान अख्तर (Farhan Akhtar) निभा रहे हैं। यह फिल्म भारतीय सैन्य इतिहास के सबसे गौरवशाली अध्यायों में से एक, ‘रेजांग ला के युद्ध’ (Battle of Rezang La) को दुनिया के सामने लाएगी। इस फिल्म का महत्व इसलिए अधिक है क्योंकि यह उन 120 अहीर सैनिकों के बलिदान को समर्पित है जिन्होंने बिना किसी आधुनिक हथियार के केवल अपने साहस के दम पर दुश्मन का मुकाबला किया था। हमारी टीम (Our team) का मानना है कि इस फिल्म के जरिए युवा पीढ़ी को बाणासुर के शहीद (Banasur ka Shaheed) और उनके त्याग के बारे में विस्तार से जानने का मौका मिलेगा।
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