राजस्थान का नया कीर्तिमान: पूंछरी का लौठा ने पुष्कर को पछाड़ा, Most Visited Temples in Rajasthan 2026)

दैनिक भास्कर की ताजा रिपोर्ट 2026 के अनुसार जानें राजस्थान में सबसे ज्यादा श्रद्धालु किस मंदिर में आते हैं? खाटू श्याम जी से लेकर पूंछरी का लौठा तक, देखें Most Visited Temples in Rajasthan 2026 और ₹250 करोड़ का नया मास्टर प्लान। राजस्थान के धार्मिक पर्यटन की पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।

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राजस्थान के टॉप 5 मंदिरों की लिस्ट ( most visited temples in Rajasthan 2026)

  • 1 खाटू श्याम जी (Khatu Shyam Ji) सीकर
  • 2 पूंछरी का लौठा (Poonchari Ka Lotha) डीग
  • 3 सांवरिया सेठ (Sanwaliya Seth) चित्तौड़गढ़
  • 4 सालासर बालाजी (Salasar Balaji) चूरू
  • 5 ब्रह्मा जी मंदिर (Pushkar) अजमेर

पूंछरी का लौठा अब राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा मंदिर बन चुका है।

राजस्थान में सबसे ज्यादा श्रद्धालु किस मंदिर में आते हैं और इसकी 2026 की ताज़ा रिपोर्ट क्या है? (Most visited temple in Rajasthan 2026?)

दैनिक भास्कर की 19 फरवरी 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, खाटू श्याम जी (सीकर) राजस्थान का नंबर 1 मंदिर है, जहाँ सालाना 2.5 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु पहुँच रहे हैं। दूसरे स्थान पर पूंछरी का लौठा (डीग) है जिसने 1.47 करोड़ श्रद्धालुओं के साथ पुष्कर को पीछे छोड़ दिया है।

पूंछरी का लौठा मंदिर की टाइमिंग क्या है और गर्मियों में दर्शन का सबसे अच्छा समय कौन सा है? (What is the timing of Poonchari Ka Lotha Temple?)

यात्रियों द्वारा सबसे ज्यादा सर्च किया जाने वाला सवाल है—पूंछरी का लौठा मंदिर की टाइमिंग (Poonchari Ka Lotha Temple Timing)। मंदिर सुबह 04:00 बजे से रात 10:00 बजे तक खुला रहता है। गर्मी के मौसम में (Summer Tips) हमारी टीम का सुझाव है कि आप सुबह 8 बजे से पहले या शाम 6 बजे के बाद ही दर्शन का प्लान बनाएं ताकि आप ब्रज की चिलचिलाती धूप से बच सकें और शांति से ‘हाजिरी’ लगा सकें।

राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा मंदिर कौन सा है और इसने पुष्कर को कैसे पीछे छोड़ दिया? (Which is the second largest temple of Rajasthan?)

वर्ष 2026 के आंकड़ों के अनुसार, डीग जिले में स्थित पूंछरी का लौठा (Poonchari Ka Lotha) अब राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा मंदिर बन गया है, जिसने प्रसिद्ध तीर्थराज पुष्कर को भी पीछे छोड़ दिया है। यहाँ साल 2025 में रिकॉर्ड 1.47 करोड़ श्रद्धालु पहुँचे। भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की विशेष रुचि और यहाँ लागू किए गए ₹250 करोड़ के मास्टर प्लान (Master Plan of 250 Crores) ने इस क्षेत्र की कायापलट कर दी है। गोवर्धन परिक्रमा के दौरान ‘हाजिरी’ लगाने की अनिवार्य परंपरा और बेहतर सड़क कनेक्टिविटी ने यहाँ के फुटफॉल (Footfall) को 95.51 लाख से बढ़ाकर सीधा 1.47 करोड़ तक पहुँचा दिया है।

‘पूंछरी का लौठा मास्टर प्लान ₹250 करोड़’ क्या है और इससे श्रद्धालुओं को क्या लाभ होगा? (What is the 250 Cr Master Plan for Poonchari Ka Lotha?)

यह मास्टर प्लान राजस्थान सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है जिसका उद्देश्य डीग के धार्मिक पर्यटन को विश्व स्तर पर पहचान दिलाना है。 इस ₹250 करोड़ के निवेश से पूंछरी का लौठा क्षेत्र में पिलग्रिम फैसिलिटेशन सेंटर, बड़े पार्किंग स्थल, आधुनिक धर्मशालाएं और छायादार परिक्रमा मार्ग विकसित किए जा रहे हैं। हमारी टीम ने स्थानीय गाइडों (Local Guides) से जाना कि इस प्लान के तहत मंदिर के चारों ओर एक ‘ग्रीन बेल्ट’ भी विकसित की जा रही है। इसका सीधा लाभ यह होगा कि अब 21 किमी की परिक्रमा करने वाले भक्तों को विश्राम और सुरक्षा की बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, जिससे स्थानीय ‘टेंपल इकोनॉमी’ को भी मजबूती मिलेगी।

क्या राजस्थान के मंदिरों का फुटफॉल (Footfall) वैष्णो देवी से ज्यादा है? (Comparison with Vaishno Devi)

हाँ, भास्कर की रिपोर्ट बताती है कि राजस्थान अब मंदिर पर्यटन में देश में छठे स्थान पर पहुँच गया है। खाटू श्याम जी और पूंछरी का लौठा में आने वाली भीड़ अब राष्ट्रीय स्तर के तीर्थ स्थलों को टक्कर दे रही है।

राजस्थान के मंदिरों में श्रद्धालुओं की संख्या अचानक इतनी क्यों बढ़ी? (Why did the number of devotees increase so much?)

भास्कर न्यूज़ के विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे तीन मुख्य कारण हैं: पहला, धार्मिक पर्यटन के लिए सरकार का भारी निवेश (₹250 करोड़ से ज्यादा); दूसरा, बेहतर परिवहन और इंफ्रास्ट्रक्चर; और तीसरा, ‘टेंपल इकॉनमी’ (Temple Economy) पर बढ़ता फोकस। हमारी टीम ने अनुभव किया कि अब लोग किलों और महलों से ज्यादा आध्यात्मिक शांति के लिए इन धार्मिक केंद्रों की ओर रुख कर रहे हैं।

राजस्थान में सबसे ज्यादा श्रद्धालु किस मंदिर में आते हैं? (Which is the most visited temple in Rajasthan?)

खाटू श्याम जी (सीकर) राजस्थान का सबसे ज्यादा श्रद्धालु वाला मंदिर है। यहाँ लक्खी मेले के दौरान ही करीब 70 लाख श्रद्धालु पहुँचने की उम्मीद है। इसके बाद दूसरे नंबर पर डीग जिले का पूंछरी का लौठा मंदिर है।

पूंछरी का लौठा मंदिर की टाइमिंग क्या है और गर्मियों में दर्शन का सबसे अच्छा समय कौन सा है?

मंदिर सुबह 04:00 बजे से रात 10:00 बजे तक खुला रहता है। यदि आप गर्मियों में पूंछरी का लौठा दर्शन का सही समय (Best time for summer visit) तलाश रहे हैं, तो हमारी टीम का सुझाव है कि सुबह 8 बजे से पहले या शाम 7 बजे के बाद ही आएं। दोपहर में ब्रज की गर्मी और गर्म रेत पैदल चलने वालों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

21 किमी गोवर्धन परिक्रमा में पूंछरी कहाँ आता है और क्या यहाँ हाजिरी लगाना अनिवार्य है? (Where is Poonchari in 21 km Parikrama?)

गिरिराज पर्वत की आकृति एक मोर जैसी है और पूंछरी गाँव उसके ‘पूँछ’ वाले हिस्से पर स्थित है, जो राजस्थान की सीमा (डीग जिले) में पड़ता है। भास्कर रिपोर्ट 2026 के अनुसार, यहाँ आने वाली 54% बढ़ी भीड़ का मुख्य कारण यही है कि अब लोग परिक्रमा पूरी करने के लिए यहाँ ‘हाजिरी’ लगाने को अनिवार्य परंपरा मान रहे हैं।

मधुमंगल सखा की कहानी हिंदी में (Story of Madhumangal Sakha in Hindi)

द्वापर युग में कृष्ण के प्रिय मित्र मधुमंगल ने कृष्ण के मथुरा लौटने पर यहीं प्रतीक्षा करने की प्रतिज्ञा ली थी। उनकी इसी निस्वार्थ भक्ति के कारण उन्हें ‘लौठा’ कहा जाता है। गोवर्धन परिक्रमा में हाजिरी का महत्व (Significance of Attendance) इसी कथा से जुड़ा है, क्योंकि कृष्ण ने वरदान दिया था कि उनके दर्शन के बिना परिक्रमा अधूरी रहेगी।

गोवर्धन से पूंछरी का लौठा की दूरी कितनी है और यहाँ पहुँचने का सबसे आसान तरीका क्या है? (What is the Poonchari Ka Lotha distance from Govardhan and how to reach?)

गोवर्धन के मुख्य कस्बे (दानघाटी मंदिर) से पूंछरी का लौठा की दूरी लगभग 5 से 6 किलोमीटर है। यह मंदिर गोवर्धन की 21 किलोमीटर की प्रसिद्ध परिक्रमा के ठीक मध्य मार्ग के पास राजस्थान की सीमा (डीग जिले) में स्थित है।यहाँ पहुँचने के लिए सबसे सुलभ साधन ई-रिक्शा (E-rickshaw) है, जिसका किराया ₹30 से ₹50 के बीच होता है। यदि आप अपनी निजी गाड़ी से आ रहे हैं, तो गोवर्धन-डीग मार्ग के माध्यम से यहाँ आसानी से पहुँच सकते हैं। हमारी टीम का निजी अनुभव (Personal Experience) कहता है कि यदि आप पैदल परिक्रमा कर रहे हैं, तो जतीपुरा से आगे बढ़ने पर पूंछरी का पड़ाव सबसे सुकून भरा होता है, जहाँ आप विश्राम भी कर सकते हैं।

गोवर्धन परिक्रमा में पूंछरी का लौठा का क्या महत्व है और क्या यहाँ दर्शन के बिना परिक्रमा पूरी मानी जाती है? (Significance of Poonchari Ka Lotha in Govardhan Parikrama?)

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गोवर्धन परिक्रमा में हाजिरी का महत्व (Significance of Attendance) सर्वोपरि है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान कृष्ण ने अपने सखा मधुमंगल (लौठा बाबा) को वरदान दिया था कि जो भी भक्त गिरिराज जी की परिक्रमा करेगा, उसे पूंछरी में आकर ‘हाजिरी’ लगानी होगी, अन्यथा उसकी परिक्रमा अधूरी मानी जाएगी।दैनिक भास्कर की 19 फरवरी 2026 की रिपोर्ट बताती है कि इसी अनिवार्य परंपरा के कारण यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में 54% की रिकॉर्ड बढ़ोत्तरी हुई है। अब लोग केवल दर्शन के लिए नहीं, बल्कि अपनी आध्यात्मिक यात्रा को पूर्ण करने के लिए यहाँ पहुँच रहे हैं। हमारी टीम ने स्थानीय गाइडों से बातचीत में जाना कि यहाँ हाजिरी लगाने का अर्थ है—ठाकुर जी के सखा के सामने अपनी उपस्थिति दर्ज कराना।

पूंछरी का लौठा (Poonchari Ka Lotha) अब केवल ब्रज परिक्रमा का एक पड़ाव मात्र नहीं रह गया है, बल्कि यह राजस्थान के गौरव और अटूट आस्था का प्रतीक बन चुका है। दैनिक भास्कर की 2026 की रिपोर्ट के आंकड़े गवाह हैं कि किस तरह राजस्थान की यह ‘टेंपल इकोनॉमी’ (Temple Economy) दुनिया भर के श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित कर रही है।

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