जोधपुर का इतिहास शौर्य और स्वाभिमान की कहानियों से भरा पड़ा है। इन्ही में से एक कहानी है हाड़ा रानी जसवंत दे (Haadi Rani Jaswant De) की, जिन्होंने अपने पति और मारवाड़ के महाराजा जसवंत सिंह प्रथम के लिए मेहरानगढ़ किले (Mehrangarh Fort) के दरवाजे बंद करवा दिए थे। हमारी टीम ने इस ऐतिहासिक स्थल का दौरा किया और स्थानीय गाइडों से इस गौरवशाली गाथा की बारीकियाँ समझीं, जिसे हम अपने अनुभव के आधार पर यहाँ साझा कर रहे हैं।
ऐतिहासिक घटना का विवरण (Historical Fact Table)
- महाराजा का नाम महाराजा जसवंत सिंह प्रथम (Jodhpur Maharaja Jaswant Singh I)
- महारानी का नाम हाड़ा रानी जसवंत दे
- युद्ध का नाम धरमत का युद्ध (Battle of Dharmat), 1658
- मुख्य कारण क्षत्रिय धर्म का पालन और स्वाभिमान
- स्थान मेहरानगढ़ किला, जोधपुर (Mehrangarh Fort, Jodhpur)
क्यों बंद किए गए थे दरवाजे? (The Reason Behind the Incident)
सन् 1658 में औरंगजेब और दारा शिकोह के बीच उत्तराधिकार का युद्ध चल रहा था। महाराजा जसवंत सिंह धरमत के मैदान में वीरता से लड़े, लेकिन घायल होने और युद्ध की परिस्थितियाँ विपरीत होने के कारण उन्हें वापस लौटना पड़ा।
जब वे जोधपुर पहुँचे, तो महारानी जसवंत दे ने किले के द्वार खोलने से मना कर दिया। उनका मानना था कि एक क्षत्रिय राजा या तो युद्ध जीतकर लौटता है या युद्ध के मैदान में वीरगति को प्राप्त होता है, वह कभी हारकर पीठ दिखाकर वापस नहीं आता। उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि “यह मेरे पति नहीं हो सकते, यह कोई और है।”
क्या रानी ने बाद में दरवाजे खोले
हाँ, अपनी सास (राजमाता) के समझाने और महाराजा के प्रतिज्ञा लेने के बाद दरवाजे खोले गए थे।
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