गोवर्धन परिक्रमा (Govardhan Parikrama) एक दिन में कैसे पूरी करें? जानें पूंछरी का लौठा (Poonchari Ka Lotha) में हाजिरी का महत्व, सखा मधुमंगल की अमर कहानी और डीग से गोवर्धन का सटीक रूट। भास्कर रिपोर्ट 2026 के अनुसार राजस्थान के इस दूसरे सबसे बड़े मंदिर और यहाँ रुकने की बेस्ट धर्मशालाओं की पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।
एक दिन में परिक्रमा पूरी करने का मास्टर प्लान (Master Plan to Complete Parikrama in One Day
एक दिन में परिक्रमा पूरी करने के लिए सुबह जल्दी शुरुआत करना सबसे बेहतर है। आप सुबह 4 से 5 बजे के बीच दानघाटी मंदिर (Dan Ghati Temple) से अपनी यात्रा शुरू कर सकते हैं। इससे आप दोपहर की तेज धूप से पहले मुख्य पड़ावों को कवर कर लेंगे।
गोवर्धन परिक्रमा परिवहन के विकल्प (Transport Options)
यदि आप पैदल चलने में असमर्थ हैं, तो पूरे परिक्रमा मार्ग पर ई-रिक्शा (E-rickshaws) और ऑटो की सुविधा उपलब्ध है। हमारी टीम ने पाया कि ई-रिक्शा सबसे किफायती और सुलभ साधन है जो आपको हर मुख्य मंदिर के पास रोकता है।
गोवर्धन परिक्रमा एक दिन में कैसे करें?
- 04:00 AM दानघाटी मंदिर (Dan Ghati Temple) परिक्रमा की शुरुआत और भगवान के दर्शन। सुबह की शांति यात्रा के लिए सबसे अच्छी है।
- 07:00 AM अन्योर गाँव (Anyor Village) 3-4 किमी की यात्रा के बाद यहाँ हल्का नाश्ता करें और जल सेवा का लाभ लें।
- 09:30 AM गोविंद कुंड (Govind Kund) यहाँ की आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करें। यह परिक्रमा का एक मुख्य धार्मिक केंद्र है।
- 11:00 AM पूंछरी का लौठा (Poonchari Ka Lotha) सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव! यहाँ अपनी ‘हाजिरी’ (Attendance) लगाएं और मधुमंगल सखा की कहानी सुनें।
- 12:30 PM स्थानीय ढाबा (Local Eatery) पूंछरी के आसपास किसी लोकल ढाबे पर सात्विक भोजन करें और थोड़ा विश्राम करें।
- 02:00 PM जतीपुरा (Jatipura) मुखारविंद मंदिर में दर्शन। यहाँ से छोटी परिक्रमा का मार्ग शुरू होता है।
- 04:30 PM राधा कुंड (Radha Kund) पवित्र स्नान या आचमन करें और कुंड की आरती में शामिल होने का प्रयास करें।
- कुसुम सरोवर (Kusum Sarovar) यहाँ की वास्तुकला देखें। सूर्यास्त के समय यहाँ का दृश्य बहुत सुंदर होता है।
- 08:00 PM दानघाटी मंदिर (वापसी) परिक्रमा पूर्ण। मंदिर में माथा टेकें और अपनी यात्रा की सफलता के लिए धन्यवाद दें।
पूंछरी का लौठा: मधुमंगल सखा की अमर कहानी (Story of Madhumangal Sakha and Krishna)
द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण के सबसे प्रिय सखा मधुमंगल (Madhumangal) यहाँ रुक गए थे। जब कृष्ण मथुरा लौट रहे थे, तो मधुमंगल ने प्रतिज्ञा की कि वे कृष्ण के वापस आने तक अन्न-जल ग्रहण नहीं करेंगे और यहीं प्रतीक्षा करेंगे। उनकी इसी निस्वार्थ भक्ति के कारण उन्हें ‘लौठा’ कहा जाता है। श्री कृष्ण ने उन्हें वरदान दिया था कि मेरी परिक्रमा तभी पूर्ण होगी जब भक्त आपके यहाँ ‘हाजिरी’ लगाएंगे।
ठहरने की उत्तम व्यवस्था (Best Stay Options near Poonchari Ka Lotha)
बढ़ती भीड़ को देखते हुए यहाँ प्रशासन और निजी ट्रस्टों द्वारा कई धर्मशालाएं और गेस्ट हाउस (Dharamshalas and Guest Houses) विकसित किए गए हैं।
- प्रमुख विकल्प: मंदिर के पास कई आधुनिक सुविधाओं वाले गेस्ट हाउस हैं जहाँ 800 से 1500 के बजट में कमरा मिल सकता है।मुख्यमंत्री का विजन: ₹250 करोड़ के मास्टर प्लान (Master Plan) के तहत यहाँ यात्रियों के लिए और भी बेहतरीन विश्राम गृह बनाए जा रहे
डीग से गोवर्धन (Deeg to Govardhan Distance and Route Guide)
डीग (Deeg) से गोवर्धन (Govardhan) की दूरी लगभग 17 से 18 किलोमीटर है।
- मार्ग (Route): आप MDR70 मार्ग द्वारा कार या टैक्सी से लगभग 30 मिनट में पहुँच सकते हैं।सड़क की स्थिति: हाल के विकास कार्यों के बाद यह सड़क काफी चौड़ी और सुगम हो गई है, जिससे श्रद्धालुओं को यात्रा में आसानी होती है。
गोवर्धन परिक्रमा में ‘हाजिरी’ (Attendance) का धार्मिक महत्व क्या है और यह परंपरा क्यों शुरू हुई? (What is the religious significance of Attendance?)
गोवर्धन की 21 किलोमीटर की परिक्रमा (21 km Parikrama) के दौरान पूंछरी का लौठा मंदिर में हाजिरी लगाना सबसे महत्वपूर्ण परंपरा है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण के सखा मधुमंगल (Madhumangal) ने द्वापर युग में यहीं बैठकर कृष्ण की प्रतीक्षा की थी। उनकी निस्वार्थ भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान कृष्ण ने उन्हें वरदान दिया था कि जो भी भक्त गिरिराज जी की परिक्रमा करेगा, उसकी पूजा और परिक्रमा तभी सफल मानी जाएगी जब वह आपके पास आकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएगा या ‘हाजिरी’ (Attendance) लगाएगा। हमारी टीम ने स्थानीय गाइड (Local Guide) से बातचीत में जाना कि भक्त यहाँ आकर यह प्रार्थना करते हैं कि ‘हे सखा, हमारी इस कठिन परिक्रमा की गवाही प्रभु के चरणों में दें।’
क्या बिना पूंछरी का लौठा के दर्शन किए गोवर्धन परिक्रमा अधूरी रहती है? (Is the Parikrama incomplete without visiting Poonchari Ka Lotha?)
, ब्रज के संतों और विद्वानों के अनुसार, पूंछरी का लौठा मंदिर के दर्शन के बिना गोवर्धन परिक्रमा को शास्त्रीय रूप से अधूरा माना जाता है。 जिस तरह किसी दरबार में जाने पर अपनी उपस्थिति दर्ज करानी पड़ती है, ठीक वैसे ही गोवर्धन परिक्रमा में मधुमंगल सखा के द्वार पर हाजिरी लगाना एक अनिवार्य नियम बन गया है। दैनिक भास्कर (Dainik Bhaskar) की ताजा रिपोर्ट (19 फरवरी 2026) के अनुसार, इसी ‘हाजिरी’ के महत्व के कारण ही आज यहाँ श्रद्धालुओं की संख्या में 54% की रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है और यह राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा मंदिर बन गया है। हमारी टीम का अनुभव (Team Experience) कहता है कि यहाँ दर्शन करने के बाद ही भक्तों के मन में परिक्रमा पूरी होने का संतोष और शांति का भाव आता है।
गोवर्धन परिक्रमा में ‘हाजिरी लगाने की सही प्रक्रिया क्या है और यहाँ किस तरह की मन्नतें माँगी जाती हैं? (What is the process of marking attendance and what are the beliefs?)
हाजिरी लगाने की प्रक्रिया अत्यंत सरल और भावपूर्ण है। परिक्रमा मार्ग पर चलते हुए भक्त जब पूंछरी पहुँचते हैं, तो वे मंदिर में प्रवेश कर सखा मधुमंगल के विग्रह (Statue) के दर्शन करते हैं। भक्त अक्सर यहाँ लड्डू या माखन-मिश्री का भोग लगाते हैं और हाथ जोड़कर यह संकल्प दोहराते हैं कि उन्होंने अपनी परिक्रमा पूरी कर ली है। मान्यता है कि जो भक्त यहाँ अपनी हाजिरी लगाता है, उसकी सभी मनोकामनाएं भगवान कृष्ण स्वयं पूरी करते हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के ₹250 करोड़ के मास्टर प्लान (Master plan of 250 Crores) के तहत अब यहाँ ‘हाजिरी’ लगाने आने वाले भक्तों के लिए क्यू-मैनेजमेंट और बेहतर शेड की व्यवस्था की गई है ताकि उन्हें लंबी कतारों में न खड़ा होना पड़े।
ई-रिक्शा का किराया (E-rickshaw fare for Govardhan Parikrama) कितना है?
E-rickshaw fare for Govardhan Parikrama काफी किफायती है। शेयरिंग ई-रिक्शा का किराया प्रति व्यक्ति ₹30 से ₹50 के बीच होता है, जबकि पूरी परिक्रमा के लिए बुक करने पर यह ₹300 से ₹500 तक हो सकता है। हमारी टीम ने पाया कि स्थानीय स्तर पर ई-रिक्शा सबसे सुलभ और सस्ता साधन है।
पूंछरी का लौठा मंदिर की टाइमिंग क्या है और दर्शन का सही समय क्या है? (What is the Poonchari Ka Lotha Temple Timing
श्रद्धालुओं के बीच सबसे ज्यादा सर्च किया जाने वाला सवाल है—पूंछरी का लौठा मंदिर की टाइमिंग (Poonchari Ka Lotha Temple Timing)। मंदिर सामान्य दिनों में सुबह 04:00 बजे से रात 10:00 बजे तक खुला रहता है। हालाँकि, एकादशी और पूर्णिमा जैसे विशेष अवसरों पर भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर के द्वार देर रात तक खुले रहते हैं। हमारी टीम का सुझाव है कि सुबह की ‘मंगला आरती’ के समय दर्शन करना सबसे सुखद होता है, क्योंकि उस समय वातावरण में अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा होती
गर्मियों में गोवर्धन परिक्रमा करने का सबसे अच्छा समय क्या है? (What is the best time for Govardhan Parikrama in summer?)
यदि आप गर्मी के मौसम में यात्रा कर रहे हैं, तो Best time for Govardhan Parikrama in summer सुबह जल्दी या रात का समय है। दोपहर की तेज धूप (12:00 PM से 04:00 PM) में परिक्रमा करने से बचें, क्योंकि राजस्थान और ब्रज की गर्मी काफी तेज होती है। हमारी टीम ने अनुभव किया कि रात 9 बजे के बाद परिक्रमा शुरू करना सबसे आरामदायक होता है, क्योंकि पूरी परिक्रमा मार्ग में लाइट की अच्छी व्यवस्था है और रात की ठंडी हवा यात्रा को सुखद बना देती है।
गोवर्धन से पूंछरी का लौठा की दूरी (Poonchari Ka Lotha distance from Govardhan)
यदि आप अपनी यात्रा गोवर्धन के मुख्य शहर से शुरू कर रहे हैं, तो Poonchari Ka Lotha distance from Govardhan लगभग 5 से 6 किलोमीटर है। यह मंदिर गोवर्धन की प्रसिद्ध 21 किमी परिक्रमा के ठीक मध्य मार्ग के पास पड़ता है। आप मथुरा या डीग से टैक्सी लेकर भी यहाँ आसानी से पहुँच सकते हैं।
पूंछरी का लौठा के लिए घोषित ₹250 करोड़ के मास्टर प्लान का मुख्य उद्देश्य क्या है? (What is the main objective of the ₹250 crore master plan?)
इस महत्वाकांक्षी मास्टर प्लान का मुख्य उद्देश्य पूंछरी का लौठा मंदिर और उसके आसपास के क्षेत्र को एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र (Major Religious Tourism Hub) के रूप में विकसित करना है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, चूँकि यहाँ श्रद्धालुओं की संख्या में 54% की रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है, इसलिए मौजूदा बुनियादी ढांचा कम पड़ रहा था। इस प्लान के तहत मंदिर परिसर का विस्तार, आधुनिक विश्राम गृह, और श्रद्धालुओं के लिए सुगम दर्शन की व्यवस्था की जाएगी。 मुख्यमंत्री का विजन है कि ब्रज परिक्रमा में आने वाले भक्तों को राजस्थान की सीमा में प्रवेश करते ही अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं मिलें।
इस विस्तृत गाइड के अंत में हमारी टीम बस यही कहना चाहती है कि गोवर्धन परिक्रमा (Govardhan Parikrama) केवल एक शारीरिक यात्रा नहीं, बल्कि आत्मा का परमात्मा से मिलन का मार्ग है। पूंछरी का लौठा (Poonchari Ka Lotha) में हाजिरी लगाना उस अटूट मित्रता और विश्वास का प्रतीक है, जो सदियों से ब्रज की इस पावन धरा पर जीवित है।”गोवर्धन की यह पावन परिक्रमा उत्तर प्रदेश और राजस्थान, दोनों राज्यों की सीमाओं से होकर गुजरती है। इसका सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव पूंछरी का लौठा राजस्थान के डीग जिले में स्थित है।”


