करणी माता जन्म कथा: जब बुआ के हाथ की अंगुलियां आपस में जुड़ गईं (Things to experience in Deshnoke)

माता का जन्म: करणी माता का जन्म 20 सितंबर, 1387 ई. को सुवाप गांव में मेहाजी किनिया के घर हुआ था.

दिव्य स्वप्न: जन्म के समय उनकी माता देवल देवी ने साक्षात् दुर्गा के दर्शन किए थे, जो असीम लावण्यमयी थीं.

बुआ को दंड: जब माता की बुआ ने कन्या जन्म को ‘पत्थर आना’ (अशुभ) कहकर उपहास किया, तो चमत्कार स्वरूप उनकी पांचों अंगुलियां आपस में जुड़ गईं ।

रिद्धि-सिद्धि का आगमन: जन्म के तीसरे दिन उनका नाम ‘रिद्धू बाई’ रखा गया, जिसके बाद पिता मेहाजी की साधारण आर्थिक स्थिति तेजी से बदलने लगी और घर में समृद्धि आ गई.

नेहड़ी जी का चमत्कार (Nehri Ji Temple): देशनोक से कुछ ही दूरी पर स्थित ‘नेहड़ी जी’ वह स्थान है जहाँ माता ने दही बिलोने के लिए सूखी लकड़ी (नेहड़ी) को जमीन में गाड़ा था, जो माता के स्पर्श से हरा-भरा पेड़ बन गया। आज भी यह वृक्ष वहां मौजूद है।

  • राव बीकाजी को आशीर्वाद: बीकानेर की स्थापना का श्रेय माता करणी के आशीर्वाद को जाता है। उन्होंने ही राव बीका को कहा था कि “बीका थारो बीकाणो, जोधाणो सूं सवायो बाजसी” (बीका, तुम्हारा बीकानेर जोधपुर से भी अधिक उन्नति करेगा)।
  • गंगा सिंह जी पर कृपा: बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह जी माता के परम भक्त थे। युद्ध के मैदान में माता ने चील (Kite) का रूप धरकर उनकी रक्षा की थी, जिसके बाद उन्होंने वर्तमान मंदिर का भव्य निर्माण करवाया।

करणी माता मंदिर के 25,000 चूहे और सफेद काबा का रहस्य (Things to experience in Karni Mata Temple)

  • 25,000 चूहों का बसेरा: इस मंदिर में लगभग 25,000 चूहे (Rats) रहते हैं।
  • सफेद काबा के दुर्लभ दर्शन: हजारों काले चूहों के बीच केवल कुछ ही सफेद चूहे (White Rats) होते हैं जिनको काबा कहते हैं।
  • सौभाग्य का प्रतीक: सफेद चूहे या काबा का दर्शन करना अत्यंत शुभ माना जाता है और मान्यता है कि इससे हर मनोकामना पूरी होती है।
  • हमारी टीम का अनुभव: हमने स्थानीय गाइड (Local Guide) से सुना कि ये सफेद चूहे माता करणी और उनके पुत्रों का साक्षात स्वरूप माने जाते हैं, जो बहुत कम और भाग्यशाली लोगों को ही दिखाई देते हैं।

इतने चूहे और मंदिर में प्लेग नहीं फैलना सबको आश्चर्य में डालता है पर मां करणी का यह चमत्कार भक्त के लिए अनन्य आस्था का पर्याय है।

माता करणी ने अपने पुत्र लक्ष्मण को पुनर्जीवित कैसे किया था?

  • लोक कथाओं के अनुसार, माता का पुत्र लक्ष्मण कोलायत की झील में डूब गया था. माता ने यमराज से संवाद किया और उसे मृत्यु के पाश से छुड़ाकर पुनर्जीवित कर दिया. इसी घटना के बाद यह मान्यता बनी कि उनके वंशज मरने के बाद चूहे (काबा) बनेंगे और चूहे मरने के बाद पुनः मनुष्य के रूप में उनके परिवार में जन्म लेंगे.

मेहरानगढ़ किले की नींव में माता की क्या भूमिका थी?

जब राव जोधा जोधपुर किले का निर्माण कर रहे थे, तो कई बाधाएं आ रही थीं. उन्होंने माता करणी को आमंत्रित किया और माता ने अपने कर-कमलों से किले की पहली ईंट रखी. माना जाता है कि माता के आशीर्वाद के कारण ही वह किला आज भी अजेय खड़ा है.

माता करणी ने अपनी छोटी बहन गुलाब बाई का विवाह अपने ही पति से क्यों करवाया?

  • माता करणी का विवाह बीठू गांव के देपाजी के साथ हुआ था, लेकिन माता सांसारिक जीवन से परे आध्यात्मिक मार्ग पर रहना चाहती थीं. उन्होंने अपने पति और परिवार की सेवा के लिए अपनी छोटी बहन का विवाह देपाजी से करवा दिया और स्वयं तपस्या में लीन रहीं.

माता करणी के 151 वर्षों के जीवन काल के पीछे की मान्यता क्या है?

लोक मान्यताओं और ऐतिहासिक ग्रंथों के अनुसार, करणी माता 151 वर्षों तक जीवित रहीं। उन्होंने अपने इस लंबे जीवन काल में न केवल चमत्कार किए, बल्कि समाज में सद्भाव, नारी सम्मान और धर्म की स्थापना की। अंत में उन्होंने अपनी स्वेच्छा से धिनेरू तलाई के पास ज्योति में विलीन होकर देह त्याग की। उनकी इतनी लंबी आयु और सदैव युवा दिखने वाली छवि को भक्त उनकी योग शक्ति और ईश्वरीय अवतार का हिस्सा मानते हैं।

माता करणी द्वारा कान्हा (महिषासुर रूपी अभिमानी राजा) के वध की घटना क्या है?

कान्हा उस समय का एक अत्यंत अहंकारी और अत्याचारी शासक था, जिसने माता के पिता मेहाजी और उनके गौ-वंश को परेशान करना शुरू किया था। जब उसकी उद्दंडता बढ़ गई, तो माता ने अपनी दैवीय शक्ति का परिचय देते हुए कान्हा का वध किया और वहां के लोगों को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई। यह प्रसंग माता की दुष्ट-दलनकारी छवि को दर्शाता है, जिसे आज भी चारण साहित्य में प्रमुखता से गाया जाता है।

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