करणी माता का चमत्कार: जब यमराज से लड़कर माता अपने पुत्र ‘लाखण’ को वापस ले आईं!

करणी माता मंदिर का रहस्य: क्यों यहाँ चूहे बनते हैं इंसान? (Karni Mata Temple Mystery)

करणी माता मंदिर (Karni Mata Temple), जिसे ‘चूहों वाला मंदिर’ भी कहा जाता है, अपनी अद्भुत मान्यताओं के लिए विश्व प्रसिद्ध है। यहाँ की सबसे बड़ी मान्यता माता जी के पुत्र लक्ष्मण (Laxman) को मिले जीवनदान और काबा (Kaba) यानी चूहों से जुड़ी है。

लक्ष्मण को जीवनदान और यमराज से संघर्ष

देपाजी को गुलाब बाई के उदर से चार पुत्र हुए थे जिसमें से सबसे कनिष्ठ पुत्र लक्ष्मण (लाखण) बहुत प्रकृति प्रेमी था। वि.सं. 1524 (1467 ई.) कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी को वह कोलायत कपिल मुनि का धाम देखने के लिए देशनोक से अपने साथियों के साथ गया था। वहीं स्नान करते समय उसकी डूबने से मृत्यु हो गयी।

उसके मित्रों ने उसके शव को पानी में से बाहर निकाला और बैलगाडी में सुलाकर देशनोक लाये। लक्ष्मण की मृत्यु का समाचार सुनकर गुलाब बाई अत्यधिक विलाप करती हुई उसका शव श्रीकरणीजी के पास ले जाकर पुनः जीवित करने की प्रार्थना करने लगी। श्रीकरणीजी के आदेशानुसार उन्होंने उस शव को अपनी झोपड़ी में रखवा दिया और स्वयं उसी झोपड़ी में ध्यानमग्न होकर बैठ गयी और तीन दिन बाद लक्ष्मण पुनः जीवित होकर झोपड़ी से बाहर निकले जिससे सारे परिवार में अपार खुशी छा गयी।

इस सम्बन्ध में यह जनश्रुति प्रख्यात है कि श्रीकरणीजी ने अपने पुत्र के प्राण वापस लाने के लिए धर्मराज के यहाँ पहुँचकर उस जीव को वापस मांगा। धर्मराज ने कहा यहाँ आने के बाद आज तक कोई वापस नहीं गया। श्रीकरणीजी ने कहा क्या आज से पहले कोई माँ अपने पुत्र को वापस लेने आयी थी? और उन्होंने विराट रूप प्रकट कर धर्मराज को दर्शन दिये और उसे कहा कि आज के बाद उनका कोई भी वंशज तुम्हारे यहाँ नहीं आयेगा।

तब से देपावत बीठू (देपाजी के वंशज) मरकर काबा (श्रीकरणी मन्दिर का चूहा) और काबा मरकर देपावत बनने का क्रम जारी है। श्रीकरणीजी ने लक्ष्मण(लाखण) को पुनर्जीवित करके देपावतों के लिये कोलायत का तालाब त्याज्य कर दिया। इसका देपावत पूर्णतः पालन करते हैं और इस वर्जित तालाब के पानी को स्पर्श तक नहीं करते। श्रीकरणीजी ने लक्ष्मण को पुनर्जीवित करके अपने चारों पुत्रों को आशीर्वाद दिया कि मेरी विद्यमानता में चारों पुत्रों में से किसी की मृत्यु नहीं होगी चाहे उनकी आयु कितनी ही अधिक हो जाये और बाद में ऐसा ही हुआ।

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